बेदाखेड़ी में विहार के दौरान आर्यिका 105 विंध्यश्री माताजी ने एक हृदयघात से पीड़ित व्यक्ति की मदद कर उसे सकुशल अस्पताल पहुंचने में मदद की। पीड़ित बुजुर्ग को णमोकार मंत्र सुनाकर उन्हें अपना मंगल आशीर्वाद भी प्रदान किया। उनका यह वात्सल्य देख सभी ने कहा-संकट काल में पीड़ित मानव की सेवा से बड़ा कोई पुण्य नहीं होता। बेदाखेड़ी से पढ़िए, यह खबर…
बेदाखेड़ी (आष्टा)। आचार्य श्री विराग सागर जी की शिष्या गणनी आर्यिका 105 विंध्य श्री माताजी का बेदाखेड़ी में (आष्टा एमपी के निकट) मंगल विहार चल रहा था, तभी एक अनोखी घटना घटित हुई। रास्ते में एक बाइक पर नवविवाहित जोड़ा और पीछे एक वयोवृद्ध दादाजी जा रहे थे। दादाजी को अचानक चलती गाड़ी पर अटैक आया। जो कि गाड़ी से गिरने को थे। इस दौरान पीछे चल रहे माताजी के संघ ने उन्हें देखा और तत्काल सहायता के लिए आगे आए। आष्टा दिगम्बर जैन पंचायत कमेटी के कोषाध्यक्ष निर्मलकुमार जैन (कोठरी) और ललित जैन धामन्दा और साथियों ने बाइक के पीछे दौड़ लगाकर दादाजी को उतारा और उन्हें नीचे लिटाकर सभी संभव प्रयास किए। माताजी ने उन्हें णमोकर मंत्र सुनाया और अपना आशीर्वाद दिया।
इस सहृदय करुणा और माताजी के आशीर्वाद से दादाजी को हृदयघात का सामना करने में मदद मिली और वे सकुशल हॉस्पिटल पहुंच गए। उन्होंने संघ का धन्यवाद और माताजी का आशीर्वाद लिया। इस घटना ने एक बार फिर जैन धर्म की मानवता और करुणा की भावना को प्रदर्शित किया है। माताजी के मंगल विहार में यह अद्भुत उदाहरण सभी के लिए अनुकरणीय और प्रेरणादायक है। संकट काल में पीड़ित मानव की सेवा से बड़ा कोई पुण्य नहीं होता। माताजी ने यह उदाहरण प्रस्तुत किया।













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