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आदिनाथ कथा की शुरुआत : सच्चा मित्र तो धर्म ही, उसका साथ कभी नहीं छोड़ें- मुनि पूज्य सागर


अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज के मुखारविंद से आदिनाथ कथा का प्रारंभ हुआ। विपिन कुमार- प्रीति जैन को मुख्य श्रोता बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस अवसर पर मुनि श्री ने कहा कि भगवान आदिनाथ ने महाबल राजा के पर्याय में जवानी, रूप, ऐश्वर्य, कुल, जाति आदि का गर्व नहीं किया। उन्होंने इन सबको धर्म का फल माना। पढ़िए सन्मति जैन काका की यह विशेष रिपोर्ट...


सनावद। अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज के मुखारविंद से आदिनाथ कथा का प्रारंभ हुआ। विपिन कुमार- प्रीति जैन को मुख्य श्रोता बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। साथ ही, सभा में दीप प्रज्ज्वलन और शास्त्र भेंट भी इन्हीं के द्वारा किया गया।

इस अवसर पर अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने आदिनाथ कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान आदिनाथ ने महाबल राजा के पर्याय में जवानी, रूप, ऐश्वर्य, कुल, जाति आदि का गर्व नहीं किया। उन्होंने इन सबको धर्म का फल माना। उन्होंने अहंकार नहीं किया; वे अपने अधिक राजा और प्रजा को हंसकर, बात करके, स्थान देकर, किसी को कुछ देकर, और किसी का सम्मान करके सबको संतुष्ट करते थे। मुनि श्री ने कहा, “आप भी महापुरुष बनना चाहते हैं, घर-परिवार में शांति चाहते हैं, तो महाबल के जीवन के इस प्रसंग को अपने जीवन में उतार लें। जो जिस योग्य हो, उसके साथ उसी प्रकार का व्यवहार करें और सबको संतुष्ट करने का कार्य करें। माता-पिता के पैर छूकर, बड़ों का आशीर्वाद लेकर, छोटों से प्रेम से बात करके, और जरूरतमंद की धन से सहायता करके हमें अपना जीवन सुधारना चाहिए।” मुनि श्री ने कहा, “महाबल के मंत्री स्वयंबुद्धि ने महाबल को संबोधन कर उसे धर्म के मार्ग पर दृढ़ किया। वैसे ही तुम भी अपना एक मित्र बनाओ, जो तुम्हें पाप करने से रोके और तुम्हें धर्म, त्याग, और तप के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करे। वर्तमान में सच्चा मित्र तो धर्म ही है; उसका साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए, उसे हमेशा अपने साथ रखना चाहिए। तभी तुम दुख में भी सुख का अनुभव कर सकते हो। सच्चा मित्र वही होता है जो तुम्हारे लिए प्रार्थना करे।” मुनि सेवा समिति के अध्यक्ष मुकेश जैन और प्रचार मंत्री सन्मति काका ने बताया कि प्रतिदिन सुबह 8:30 बजे आदिनाथ कथा और शाम 7 बजे आनंद यात्रा शांति वर्धमान देशना सभा सभा ग्रह में होती है।

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