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आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के समाधि दिवस पर विनयांजलि सभा की : आचार्य श्री संपूर्ण राष्ट्र को नैतिकता, संस्कार और आत्मसंयम की दिशा दिखाई


दिगम्बर जैन सोशल ग्रुप अंबाह के तत्वावधान में परेड स्थित दिगम्बर जैन मंदिर परिसर में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के समाधि दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और संयम भाव से परिपूर्ण विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर…


अंबाह। दिगम्बर जैन सोशल ग्रुप अंबाह के तत्वावधान में परेड स्थित दिगम्बर जैन मंदिर परिसर में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के समाधि दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और संयम भाव से परिपूर्ण विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर समाजजनों ने आचार्य श्री के चरणों में भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके महान त्याग, तप, ज्ञान और राष्ट्रधर्म के प्रति समर्पण को नमन किया। पूरा वातावरण भक्ति, साधना और आत्मचिंतन की भावना से ओतप्रोत दिखाई दिया। सभा की शुरुआत आचार्य श्री के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं मंगलाचरण से हुई। इसके बाद उपस्थित श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से नवकार मंत्र का जाप किया। जिससे मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से गूंज उठा। समाजसेवी महेश जैन विकल ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आचार्य विद्यासागर महाराज केवल एक संत ही नहीं, बल्कि युगदृष्टा आचार्य थे। उन्होंने अपने कठोर तप, साधना और ओजस्वी विचारों से न केवल जैन समाज, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र को नैतिकता, संस्कार और आत्मसंयम की दिशा दिखाई।

राष्ट्रभाषा हिंदी और संस्कृत के संरक्षण पर जोर दिया

विनयांजलि सभा में आचार्य श्री के जीवन दर्शन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए संध्या अनिल जैन खरगोला ने कहा कि आचार्य श्री ने अपने संपूर्ण जीवन में अहिंसा, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य और आत्म संयम को व्यवहार में उतारकर समाज के सामने आदर्श प्रस्तुत किया। उनका सादगीपूर्ण जीवन, अल्पाहार, कठोर तपस्या और अनुशासन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने राष्ट्रभाषा हिंदी और संस्कृत के संरक्षण व प्रचार पर विशेष बल दिया तथा शिक्षा, संस्कार और संस्कृति को समाज की रीढ़ बताया।

अपरिग्रह के मार्ग पर चलने से मानव जीवन सार्थक

वीरेंद्र जैन शिक्षक ने कहा कि आचार्य विद्यासागर महाराज का संदेश था कि ‘परिवर्तन बाहर से नहीं, भीतर से शुरू होता है।’ उन्होंने सिखाया कि यदि व्यक्ति अपने विचार, आचरण और व्यवहार को शुद्ध कर ले तो समाज और राष्ट्र स्वतः सशक्त हो जाते हैं। उनका मानना था कि उपभोग नहीं, संयम ही सच्चा सुख देता है और अपरिग्रह के मार्ग पर चलकर ही मानव जीवन सार्थक बनता है। गौ-संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी के विचारों को उन्होंने केवल उपदेश तक सीमित नहीं रखा, बल्कि स्वयं के जीवन में उतारकर समाज के सामने उदाहरण प्रस्तुत किया।

प्रेरक वचनों और उपदेशों का वाचन किया

कार्यक्रम के दौरान आचार्य श्री की स्मृति में मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद उनके प्रेरक वचनों और उपदेशों का वाचन किया गया, जिन्हें सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। विमल जैन राजू ने कहा कि आचार्य श्री का समाधि दिवस केवल स्मरण का दिन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और उनके आदर्शों को जीवन में उतारने का संकल्प लेने का अवसर है। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची विजय बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि इंद्रियों पर विजय पाने में है।

त्याग, तप और सेवा का जीवंत उदाहरण

दिगम्बर जैन सोशल ग्रुप अंबाह के अध्यक्ष संतोष जैन ने अपने उद्बोधन में कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का संपूर्ण जीवन त्याग, तप और सेवा का जीवंत उदाहरण है। उनके आदर्शों पर चलकर ही हम उन्हें सच्ची विनयांजलि अर्पित कर सकते हैं। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि आचार्य श्री के संदेशों को केवल सुनने तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने दैनिक जीवन में अपनाएं।

सभा के अंत में समाजजनों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे आचार्य विद्यासागर महाराज के बताए मार्ग—अहिंसा, संयम, सादगी और सेवा पर चलेंगे तथा उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाएंगे। इस अवसर पर दिगम्बर जैन सोशल ग्रुप के पदाधिकारी, जैन समाज के वरिष्ठजन, युवा वर्ग एवं मातृशक्ति बड़ी संख्या में उपस्थित रही। कार्यक्रम का समापन शांतिपाठ के साथ हुआ। विनयांजलि सभा श्रद्धा, साधना और समर्पण का सशक्त संदेश देकर सभी के मन में आचार्य श्री की स्मृतियों को और अधिक सजीव कर गई।

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