नांद्रे नगर में चातुर्मासरत मुनिराजों के प्रवचन और दर्शन के लिए बड़ी संख्या में समाजजन आ रहे हैं। रोज यहां धर्मसभा में अनमोल वचनों का लाभ लिया जा रहा है। आचार्यश्री विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्यों की धर्मदेशना से यहां पर धर्म प्रभावना प्रबल स्तर पर है। नांद्रे से पढ़िए, यह खबर…
नांद्रे। नगर में चातुर्मासरत मुनिराजों के प्रवचन और दर्शन के लिए बड़ी संख्या में समाजजन आ रहे हैं। रोज यहां धर्मसभा में अनमोल वचनों का लाभ लिया जा रहा है। आचार्यश्री विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्यों की धर्मदेशना से यहां पर धर्म प्रभावना प्रबल स्तर पर है। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष श्री अभिषेक अशोक पाटील, कोल्हापुर ने कहा कि आचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्री श्रुतसागरजी महाराज भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर विराजित रहकर नित्य प्रवचन में लोगों को धर्म मार्ग बता रहे हैं।
शुक्रवार को मुनि श्री जयंत सागरजी महाराज ने कहा कि जीवन में जब भी कोई काम करो उसको सोचकर विचार कर करो कि ये जो कार्य हम करेंगे उसका फल क्या होगा? परिणाम क्या भुगतना होगा हमें? मित्र भी ऐसे बनाओ जो हमें बुरे कार्याे से बुरी हरकतांे से रोके। ऐसे मित्रो की संगत मत करो, जो हमें व्यसनों की ओर ले जाएं क्योंकि, आज के युवा एवं युवतियों की नई उम्र है और जल्दी प्रभावित हो जाते हैं। अगर हमने मजाक मंे ही कोई व्यसन किया, ये सोच कर कि रोज तो नहीं करना है, आज ही तो करना है बस समझ जाओ आपने अपने व्यसनी होने का बीज डाल दिया है क्योंकि, एक छोटे से कीड़े से पूरा वृक्ष समाप्त हो जाता है अगर उसको अलग नहीं किया तो। इसलिए ऐसे व्यसन मत करो जो आपको नशा करने पर आतुर कर दे और नशे की लत अगर किसी को लग गई, व्यक्ति को नष्ट और समाप्त करके ही मानती है। इसलिए जो कार्य करो, जिससे भी मित्रता करो, सोच समझकर करो।













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