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अहंकार में व्यक्ति विनाश को प्राप्त हो जाता है : विश्व शांति महायज्ञ के लिए निलांजन का किया जाएगा चयन


इस संसार में रावण से बढ़कर कोई धनवान नहीं हुआ तो अहंकार भी उसका उतना ही भारी था लेकिन, जब सामने विश्वास से भरे श्री श्री राम आए तो रावण का भी अहंकार टिक ना सका। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि मुझे विश्वास है कि मेरे पति एक दिन आएंगे और मुझे इस दुष्ट के बंधन से मुक्त कराएंगे। अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर…


अशोकनगर। अहंकार और विश्वास में बहुत अंतर है। अहंकार में व्यक्ति ग़ाफ़िल होकर विनाश को प्राप्त हो जाता है। इस संसार में रावण से बढ़कर कोई धनवान नहीं हुआ तो अहंकार भी उसका उतना ही भारी था लेकिन, जब सामने विश्वास से भरे श्री श्री राम आए तो रावण का भी अहंकार टिक ना सका। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि मुझे विश्वास है कि मेरे पति एक दिन आएंगे और मुझे इस दुष्ट के बंधन से मुक्त कराएंगे। सती सीता के इसी विश्वास ने काम किया और श्री राम ने समुद्र को भी विश्वास के बल पर पुल बांध कर लंका विजय की।तो विश्वास बहुत बड़ी चीज है। इसे बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस पृथ्वी पर हम भार है या सौभाग्य है। अपने आप की क्या कीमत है क्या? तुमनें महसूस किया कि मैं बहुत काम का हूं मेरे दिमाग ने ना जाने कितने लोगों की जिंदगी बचाई क्या ऐसा कोई काम किया कि जगत आपकी कीमत कर रहा है। परिवार में तुम्हारी क्या अहमियत है।

आपने ऐसा कोई काम किया कि परिवार के, आपके कुटुम्ब का मान सम्मान बढ़ता चला गया। तुम कहते हो तुम धर्मात्मा हो।तुम्हारे बिना धर्म विकलांग हो जाए क्योंकि, धर्म धर्मात्मा बिना चल नहीं सकता क्या? तुम धर्म के काम किया क्या? तुमने ऐसा धर्म किया कि धर्म आपके कारण धर्म आगे बढ़ ऐसा अंदर से भाव आना चाहिए। यदि आप ने अपनी अच्छाइयां पहचान लिया।

’थोड़ी तुम्हारे प्रतिकूलता हुई कि तुम गुरु बदल लेते हो

उन्होंने कहा कि आप ने गुरु महाराज को हजार नमोस्तु किया और आशीर्वाद नहीं मिला तो आप तपस्वी हो, गुरु ने आपको तपस्या रूप प्रायश्चित दे दिया। हमें मान लेना चाहिए फिर देखना एक दिन ऐसा भी आएगा कि तुम्हारे लिए सदा टाइम मिलता रहेगा। क्या समझ रखा है गुरु को, गुरु तुम्हारी प्रशंसा करेंगे। गुरु ने हमारे काम को सराहा। धर्म बहुत आगे कि बात है। थोड़ी तुम्हारे प्रति कूलता हुई कि तुम गुरु बदल लेते हो। लोग तुम्हारे से बोलने को तरसते है और गुरु बोले नहीं। यदि आप केमन में ये भाव आ गया कि गुरु कभी मेरा अहित नहीं कर सकते। गुरु तो मेरे परम उपकारी हैं तुरंत तुम्हारे मन में भाव आना चाहिए। गुरु तुम्हारे मन में भाव आए कि गुरु मेरे परम हितैषी है वे तुम्हारा बुरा विचार ही कर सकते। रानी लक्ष्मीबाई अपने बेटे को पीठ पर बांधे थी। जब लक्ष्मीबाई ने बेटे से पूछा कि बेटा तुझे ऐसा बेटा बनने के लिए दामोदर बनना पड़ेगा। ऐसा बनने के लिए श्री राम बनना पड़ेगा।

एक साथ चार चार जिनालयों की होगी प्रतिष्ठा

इस दौरान जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि वर्षों बाद नगर में हो रहे श्री मद्जिनेन्द्र पंच कल्याणक महामहोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ में शहर के सबसे प्राचीन गांव मंदिर के साथ ही गंज मंदिर पार्श्वनाथ मंदिर एवं श्री शांतिनाथ त्रिकाल चौबीस जिनालयों की प्रतिष्ठा मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया के निर्देशन में होने जा रही है। इस महा महोत्सव निलांजन का चयन किया जाना है। इसके लिए आप अपने नाम हम तक पहुंचा दें। अंतिम निर्णय बाल ब्रह्मचारी प्रदीप भैया जी का होगा। इस दौरान जैन अध्यक्ष राकेश कांसल उपाध्यक्ष अजित बरोदिया, प्रदीप तारई, राजेंद्र अमन, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई मंत्री शैलेंद्र श्रागर, मंत्री संजीव भारिल्य, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय केटी संयोजक मनोज रन्नौद, उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, श्रेयांस घैला थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींग ूमिल महामंत्री मनोज भैसरवास विपिन सिंघई अन्य प्रमुख जनों ने घटयात्रा कलशों का प्रदर्शन किया।

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