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सात मंजिला भव्य समवशरण बना आस्था का केंद्र, णमोकार तीर्थ से नासिक की धार्मिक पहचान और मजबूत: उप-शीर्षक: 27 एकड़ में आकार ले रहा भव्य तीर्थ, डेढ़ वर्ष से जारी निर्माण कार्य; 108 फीट ऊँचा समवशरण श्रद्धालुओं का मुख्य आकर्षण


नासिक में 27 एकड़ में बन रहा णमोकार तीर्थ तेजी से आस्था का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। सात मंजिला 108 फीट ऊँचा समवशरण, 51 फीट की चंद्रप्रभु प्रतिमा और स्वर्णमयी रथ श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं। संपादक रेखा जैन की विशेष रिपोर्ट


नासिक । नासिक,जो पहले से ही तपोभूमि और संतों की साधना के लिए जाना जाता है, अब एक और बड़ी पहचान की ओर बढ़ रहा है। यहां 27 एकड़ में बन रहा “णमोकार तीर्थ” शहर की धार्मिक महत्ता को नई ऊंचाई देने वाला है।

जैन धर्म में णमोकार मंत्र का बहुत बड़ा महत्व है, और उसी भावना को साकार करने के लिए यह पूरा प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। हर निर्माण धार्मिक परंपराओं और शास्त्रीय मानकों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।

सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र है 108 फीट ऊँचा सात मंजिला भव्य समवशरण। जैन मान्यता के अनुसार समवशरण वही पवित्र स्थान है जहाँ तीर्थंकर भगवान सभी जीवों को समान रूप से उपदेश देते हैं। यहां पहली मंजिल पर भूतकाल के 24 तीर्थंकर, दूसरी मंजिल पर वर्तमान के 24 और तीसरी मंजिल पर भविष्य के 24 तीर्थंकरों की प्रतिमाएँ स्थापित की गई हैं। इस तरह कुल 72 प्रतिमाएँ यहां की शिल्पकला को जीवंत बना रही हैं।

समवशरण में मूलनायक 108 श्री चंद्रप्रभु भगवान की लगभग 51 फीट ऊँची प्रतिमा स्थापित की जा रही है। साथ ही 27 तीर्थंकरों की प्रतिमाएँ, नवग्रह, पंचकल्याणक, यंत्र, महामंत्र और ज्ञान-विज्ञान से जुड़े प्रतीक भी यहां स्थापित किए जा रहे हैं।

यहाँ छह विशेष भव्य प्रतिमाएँ भी श्रद्धालुओं का ध्यान खींच रही हैं। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव, उनके पुत्र भरत और बाहुबली, साथ ही नेमिनाथ, महावीर स्वामी और पार्श्वनाथ की लगभग 31 फीट ऊँची प्रतिमाएँ एक ही पत्थर से तराशी गई हैं। ये विशाल पत्थर राजस्थान से लाए गए हैं और उन पर की गई बारीक नक्काशी देखने लायक है।

परिसर में 150 से ज्यादा आकर्षक मूर्तियाँ बनाई गई हैं। चारों दिशाओं में सहस्र जिनबिंब स्तंभ तैयार किए गए हैं। बाहर नौकाविहार के लिए तालाब और परिक्रमा के लिए विशेष मार्ग भी बनाया जा रहा है, जिससे श्रद्धालु आसानी से पूरे परिसर की परिक्रमा कर सकें।

एक खास आकर्षण है स्वर्णमयी रथ। करीब 25 किलो तांबे से बने इस रथ पर शुद्ध सोने की परत चढ़ाई गई है। धार्मिक प्रतीकों से सजा यह रथ आचार्यों और साधु-संतों के स्वागत में उपयोग किया जाएगा।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए करीब 250 कमरों की धर्मशाला भी बनाई जा रही है, ताकि देश-विदेश से आने वाले भक्तों को ठहरने में कोई परेशानी न हो।

100 से ज्यादा राजस्थानी कारीगर पिछले डेढ़ साल से इस तीर्थ को आकार देने में लगे हुए हैं। हर भवन और प्रतिमा में राजस्थानी शिल्पकला की झलक साफ दिखाई देती है।

आने वाले समय में णमोकार तीर्थ नासिक ही नहीं, बल्कि पूरे देश के जैन समाज और श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख आस्था केंद्र बनने जा रहा है।

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