जैन समाज द्वारा सेवाभावी युवा साहिल भाई का गरिमामय स्वागत एवं सम्मान किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि युवावस्था मुनिराजों की सेवा एवं उच्च से उच्च पुण्य अर्जन का सर्वाेत्तम समय होती है। मडावरा से पढ़िए, यह खबर…
मडावरा। जैन समाज द्वारा सेवाभावी युवा साहिल भाई का गरिमामय स्वागत एवं सम्मान किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि युवावस्था मुनिराजों की सेवा एवं उच्च से उच्च पुण्य अर्जन का सर्वाेत्तम समय होती है। प्रत्येक युवा को मन-वचन-काय से मुनिराजों की सेवा के लिए सदा समर्पित रहना चाहिए, ताकि साधु-संतों को सेवार्थियों की कमी न खले और उनका आहार-विहार-निहार अनवरत चलता रहे। साहिल भाई का व्यक्तित्व केवल एक सेवक का नहीं, बल्कि देव-शास्त्र-गुरु सेवा को सर्वाेपरि मानने वाले समर्पित श्रावक का है। शाश्वत तीर्थराज श्री सम्मेद शिखरजी की पावन भूमि पर विराजित पंच तीर्थों एवं आसपास के ग्रामों में स्थित दिव्य जिनबिम्बों के दर्शन घर बैठे उपलब्ध कराकर उन्होंने असंख्य श्रद्धालुओं को पुण्यलाभ से जोड़ा।
गुरुचरणों का विशेष आशीर्वाद प्राप्त किया
मुनि श्री समतासागर जी महाराज ससंघ के साथ दो माह तक रहकर साहिल भाई ने आहार, विहार, निहार एवं वैयावृत्ति की समस्त व्यवस्थाएं अत्यंत विनय, मर्यादा एवं निःस्वार्थ भाव से कराईं। साधु-संतों एवं आर्यिकाओं की सेवा में उनकी तत्परता, समय पूर्व आवश्यकता की समझ और सहज सहयोग सराहनीय रहा। सहज, सरल एवं मृदुभाषी स्वभाव के धनी साहिल भाई ने श्री सम्मेद शिखरजी की 34 वंदनाएं कर गुरुचरणों का विशेष आशीर्वाद प्राप्त किया। समाजजनों ने इसे संपूर्ण क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बताया और उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की।













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