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जैन रत्न प्रतिष्ठाचार्य अजीत शास्त्री को दी श्रद्धांजलि : समाजजनों ने किया गुणानुवाद 


जैन जगत एवं समाज के प्रकांड विद्वान अजीत शास्त्री ग्वालियर का 15 जनवरी की रात्रि में देवलोकगमन हो गया था। समाज जन ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि आप के निधन से जो रिक्त स्थान हुआ। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…


इंदौर। जैन जगत एवं समाज के प्रकांड विद्वान अजीत शास्त्री ग्वालियर का 15 जनवरी की रात्रि में देवलोकगमन हो गया था। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि जैन समाज के ख्याति प्राप्त विद्वान, प्रतिष्ठाचार्य, विधानाचार्य, वास्तुविद, ज्योतिषाचार्य अजीत शास्त्री का जन्म मुरार (ग्वालियर) में जैसवाल जैन समाज के श्रावक श्रेष्ठी स्व. मुंशीलाल जैन “कविवर” के 4 जनवरी 1961 में हुआ था। आप बचपन से ही देव, शास्त्र, गुरु के प्रति समर्पित सेवा भावी स्वाध्याय प्रेमी थे। आपके कुशल निर्देशन में स्याद्वाद प्रेस सोनागिर से सैकड़ों जैन सहित्य का प्रकाशन हुआ। आपको अनेक भाषाओं प्राकृत, हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत आदि भाषाओं का ज्ञान था । आपने अनेकों बड़े बड़े दिगंबराचार्यों के सान्निध्य में जिनबिंब पंचकल्याणक, विधान एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों को कराने में महती भूमिका निभाई। आपने अपनी कार्यशैली एवं योग्यता के बलबूते पर जैन विद्वत जगत में अपनी अलग पहचान बनाई। वर्तमान में आप जैसवाल जैन धर्मशाला सोनागिर एवं श्री जिनेश्वर धाम तीर्थ क्षेत्र बरई के अध्यक्ष पद पर सुशोभित थे। आपके निर्देशन में अतिशय क्षेत्र जिनेश्वर धाम तीर्थ बरई विकास के लिए आप ने अनेक कार्य किए आप जैन दर्शन के साथ साथ ज्योतिष, वास्तुविद के अच्छे ज्ञाता थे।

आपके निधन का समाचार सुनते ही सम्पूर्ण जैन जगत विद्वत जगत में शोक की लहर फैल गई। जैन समाज के मूर्धन्य विद्वान प्रतिष्ठाचार्य अजीत शास्त्री के असमय निधन से भारत वर्षीय जैन समाज को अपूरणीय क्षति हुई है।

इन्होंने दी श्रद्धांजलि

इंदौर दिगम्बर जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी डॉ जैनेन्द्र जैन, महावीर ट्रस्ट के अध्यक्ष अमित कासलीवाल, फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोहर झांझरी, समाजिक सांसद के अध्यक्ष विनय बाकलीवाल, हंसमुख गांधी, टीके वेद, नरेंद्र वेद, मयंक जैन, भूपेंद्र जैन, सुशील पांड्या एवं फेडरेशन की राष्ट्रीय शिरोमणि संरक्षिका पुष्पा कासलीवाल, रेखा जैन श्रीफल, मुक्ता जैन आदि समाज जन ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि आप के निधन से जो रिक्त स्थान हुआ। जिसकी निकट भविष्य में पूर्ति किया जाना संभव नहीं हैं।

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