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नई पीढ़ी के संस्कार और चरित्र का निर्माण करते हैं शिक्षक: विहार के दौरान नम आंखों से मुनिश्री समत्व सागरजी महाराज को दी विदाई 


दिगंबर जैन समाज के सौजन्य से बड़ा मंदिर परिसर में भव्य शिक्षक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित संतों के सान्निध्य में शिक्षकों ने भारतीय ज्ञान परंपरा की दिशा और भूमिका पर विचार साझा किए। मुनिश्री समत्व सागरजी महाराज बोले कि शिक्षक समाज के सच्चे पथ प्रदर्शक हैं। महरौनी से पढ़िए, यह खबर…


महरौनी। दिगंबर जैन समाज के सौजन्य से बड़ा मंदिर परिसर में भव्य शिक्षक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित संतों के सान्निध्य में शिक्षकों ने भारतीय ज्ञान परंपरा की दिशा और भूमिका पर विचार साझा किए। मुनिश्री समत्व सागरजी महाराज बोले कि शिक्षक समाज के सच्चे पथ प्रदर्शक हैं। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुनिश्री समत्व सागर जी महाराज ने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि नई पीढ़ी के संस्कार और चरित्र का निर्माण करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा परीक्षा उत्तीर्ण कराने तक सीमित न रहकर मानवीय मूल्य, अनुशासन और जीवन दृष्टि के विकास में सहायक होनी चाहिए। मुनि श्री शील सागर जी महाराज ने शिक्षण को साधना की सर्वाेच्च विधा बताते हुए अध्यापन को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला कहा।

अतिथियों ने बौद्धिक पहल की सराहना की 

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उप जिलाधिकारी रजनीश बाजपेयी उपस्थित रहे और उन्होंने जैन समाज द्वारा आयोजित इस बौद्धिक पहल की सराहना की। अध्यक्षता शिक्षाविद् प्रताप सिंह परिहार (गुड़ा) ने की। संचालन संजीव शास्त्री ने किया। राजेश जैन (शिक्षक) ने आभार व्यक्त किया।

द्वार-द्वार पाद प्रक्षालन कर आशीर्वाद लिया 

मुनिश्री समत्व सागर एवं मुनिश्री शील सागर का महरौनी नगर से मंगल विहार हुआ। नगरवासियों ने नम आंखों से विदाई दी। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने द्वार-द्वार पाद प्रक्षालन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। वहीं जयकारों से पूरा नगर गुंजायमान हो उठा। मंगल विहार के बाद बुधवार को मुनिश्री का सैदपुर में आगमन प्रस्तावित है, जहां आहारचर्या होगी। आयोजन समिति जैन शिक्षक संघ एवं संकल्प दिगंबर जैन समाज महरौनी ने नगरवासियों और शिक्षकों की सहभागिता के लिए कृतज्ञता जताई।

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