सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में पूर्णमासी के अवसर पर वृहद शांतिधारा का आयोजन किया गया। कुंडलपुर से पढ़िए, यह खबर…
कुंडलपुर। सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में पूर्णमासी के अवसर पर वृहद शांतिधारा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर शांतिधारा करने का सौभाग्य श्रेष्ठी संजय डॉ. मनीषा मेहुल सिंघई रतनचंद श्रद्धा जैन परिवार यूएसए, आलोक प्रियंका ऐरा सतीश जैन परिवार इतवारी नागपुर, ललितेश मुकेश नितिन अंकित जैन परिवार फिरोजाबाद ,पंकज अतिशय यश जैन मुरादाबाद ,अनुराग जिनेश कुमार सोधिया गढ़ाकोटा ने प्राप्त किया। मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने वृहद शांतिधारा का वाचन किया। इस अवसर पर मुनि श्री ने वृहद शांतिधारा का महत्व बतलाते हुए कहा कि जब कभी भी हमारा मन अशांत होता है तो अरिष्ट निवारक इन वृहद शांतिमंत्रों का प्रयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि ऋद्धि मंत्रों का जाप जीवन में शांति, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा को स्थापित कर वातावरण को शांत और पवित्र बनाता है, जो मानसिक शांति और आध्यात्मिक उत्थान में सहायक सिद्ध होता है। इन मंत्रों के जाप से अशुभ कर्म नष्ट हो जाते हैं जो समाज में आध्यात्मिक शुद्धि और एकता की ओर अग्रसर करता है तथा व्यक्तिगत रुप से सांसारिक दुखों से मुक्ति पाने में मदद करता है। शांति मंत्रों की तरंगें शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं तथा यह माना जाता है कि शांतिमंत्रों के नियमित प्रयोग से बीमारियां दूर हो जाती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। प्रचारमंत्री जयकुमार जैन जलज ने बताया कि आज प्रातः 9 से 10 बजे तक 55 मिनट की यह वृहद शांतिधारा मुनि श्री के मुखारविंद से हुई।
मै कौन हूं ? मेरा स्वरूप क्या है?
मुनि श्री ने कहा कि मंत्रों की एकाग्रता से सांसारिक चिंताओं से दूर होकर आत्मा के शुद्ध स्वरूप पर ध्यान केंद्रित हो जाता है। आत्मज्ञान ही हमारे जीवन के उत्कर्ष का आधार है। आत्मा को जाने बिना कभी भी कल्याण नहीं हो सकता। जिसको एक बार आत्मज्ञान हो जाता है। उसकी प्रवृत्ति में स्वाभाविक सहजता आ जाती है। मै कौन हूं ? मेरा स्वरूप क्या है? मेरा गुणधर्म क्या है? मेरा स्वभाव क्या है? जो इस बात को समझ लेता है। उसका भ्रम टूटता है। वृह्म के बोध से ही मर्म का निवारण होता है।
यह काम भोग शरीर की खाज खुजाने के समान
भ्रम टूटने से ही मर्म की उपलब्धि और कर्म का निवारण होता है,आचार्य कुंदकुंद देव कहते है कि मैं कौन हूं ? जिस दिन जीवन की यह सच्चाई को जान लोगे, तो तुम्हारा सारा व्यामोह दूर होकर जीवन की दशा और दिशा बदल जाएगी। उन्होंने कहा कि क्षण मात्र के सुख के पीछे अपने संपूर्ण जीवन और अपनी संपूर्ण शक्ति को इस ‘काम भोग’ की लालसा में लगा देते हो। मुनि श्री ने कहा कि अब भी संभल जाओ? यह काम भोग शरीर की खाज खुजाने के समान है। उसको खुजलाने में सुख नहीं मिलता उस पर मलहम लगाने में ही सार है। उसी प्रकार जिसको आत्मज्ञान हो जाता है,वह काम भोग की खुजली को खुजलाता नहीं उस खाज पर तत्वज्ञान की मलहम लगाकर उसे स्थाई रुप से ठीक करता है।
शंका समाधान का आयोजन हुआ
इस अवसर पर पूज्य मुनि श्री संधानसागर जी महाराज सहित समस्त क्षुल्लक जी एवं ब्रह्मचारी भैया, कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के पदाधिकारी, सदस्य बड़ी में संख्या देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालु भक्त उपस्थित थे। आज भी श्रद्धालुओं ने अभिषेक, पूजन एवं आहारचर्या में भाग लेकर जीवन कृतार्थ किया। शंका समाधान का भी आयोजन हुआ। भक्तामर दीप अर्चना और पूज्य बड़े बाबा की महाआरती हुई।













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