हमारे यहां वृद्ध सेवा को सर्वोच्च माना गया है। वहीं विदेशों में सिर्फ उपयोग है। यह उद्गार कदवया के निकट पचराई तीर्थ क्षेत्र में मेला महोत्सव में मुनि श्री सुधासागरजी ने व्यक्त किए। कदवया से पढ़िए, यह खबर…
कदवया। हमें सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध विरासत मिली है। भारत का इतिहास दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। कभी सांस्कृतिक दृष्टि से कभी धार्मिक दृष्टि से और सामारिक दृष्टि से हम आगे बढ़ रहे हैं। हमारे यहां वृद्ध सेवा को सर्वोच्च माना गया है। वहीं विदेशों में सिर्फ उपयोग है। यह उद्गार कदवया के निकट पचराई तीर्थ क्षेत्र में मेला महोत्सव में मुनि श्री सुधासागरजी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि विदेशी व्यक्ति की जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, वे यूज लेस होते जाते हैं। उनको उनके ही लोग छोड़ देते हैं। उसे कोई चाहत ही नहीं, उन्हें वृद्ध आश्रम में भेज देते हैं। जहां वे अवसाद की ज़िंदगी जीने के लिए मजबूर हो जाते हैं। भारतीय संस्कृति में जो जितना उम्रदराज होता जाता है, उतना ही पूज्यनीय होता जाता है।
हमारे यहां भी पश्चिम की हवा आने लगी
भारतीय दर्शन में उसे शुभ सगुन माना जाता है। मुनि श्री ने कहा कि हमारे यहां जितना बूढ़ा हो उस व्यक्ति का आशीर्वाद मिले उतना ही मंगल हो जाता है। सौ साल से अधिक उम्र में कोमा में भी पड़ा है तो भी वह मांगलिक है। आज हमारे यहां भी पश्चिम की हवा आने लगी है। आज कुछ लोग हमारे यहां भी वृद्ध माता-पिता को भार मान लिया तो आपकी जिंदगी बहुत अभिशप्त होगी। बच्चों को गोद लेना तो तुम्हारा स्वार्थ है और वृद्ध माता-पिता को गोद लेना परमार्थ है। आचार्य भगवंत ज्ञानणा में कहा गया कि अपनों से छोटों की सेवा करना तो व्यवहार है। वृद्ध सेवा के लिए ढूंढकर सेवा करना।
जितना वृद्ध असमर्थ हो उतना ही मांगलिक होगा
हमारे आचार्य भगवंत के गुरुदेव तो वयोवृद्ध थे। जिस तरह से आचार्य महाराज ने आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की सेवा की। वह एक नजीर बन गई। जिस घर एक वृद्ध होगा उस घर में मंगल ही मंगल होगा। जितना वृद्ध असमर्थ हो उतना ही मांगलिक होगा। तुम उसे भार मानते हो उसे भार मत मानना। एक विदेशी से मैंने पूछा आप लोग यहां क्या देखने आते हैं तब वह विदेशी कहता है, यहां तीर्थ बहुत कम थे, जहां भगवान का जन्म होता है वहीं तीर्थ कहते हैं। तीर्थ तो वहीं है। जहां भगवान के पंच कल्याणक मनाए जाएं वहीं तीर्थ हो जाता है।
उन्होंने कहा कि मुझे पता है आज मेले का आनंद लेने आप सब एकत्रित हुए है। भारत गांव में बसता था, जिस मंदिर ने वरदान दिया है। जिस मंदिर से हमारे पूर्वजों का संबंध रहा। उसकी सेवा करने से पित्रदोष दूर हो जाते हैं।
पांडा शाह द्वारा बसाया गया पचराई तीर्थ क्षेत्र
इसके पहले मध्यप्रदेश महासभा के संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि पांडा शाह द्वारा स्थापित किए गए अति प्राचीन तीर्थ क्षेत्र श्री पचराई तीर्थ पर शनिवार को मेला महोत्सव का आयोजन किया गया है। जिसे मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ का सान्निध्य मिला है। इस दौरान महामंत्री डॉ.चक्रेश जैन ने कहा कि आगामी दिनों में तीर्थोदय तीर्थ गोलाकोट में भव्य पंच कल्याणक महोत्सव की तैयारियां जोरों पर है। आप और हम सब मिलकर इस महोत्सव को ऐतिहासिक बनाने जा रहे हैं।
सहयोगियों का आभार जताया
अशोक नगर जैन समाज के अध्यक्ष राकेश कांसल ने कहा कि अशोक नगर चातुर्मास के दौरान जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने हर समारोह को अभूतपूर्व बनने में बहुत बड़ा योगदान दिया है। हम उनका आभार व्यक्त करते हैं और हमारे ज़िले वह लगातार व्यवस्थाओं को बनाए हुए हैं। मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि आज हम आपके चरणों में आभार व्यक्त क्या करें बस इतना निवेदन करना चाहते हैं। हमें आगे भी अवसर मिलते रहें। इस दौरान नीलेश बड़कुल, नितिन बज, अक्षय अमरोद, सार्थक जैन सहित अन्य प्रमुखजनों ने श्रीफल भेंट किए।













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