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देवी अहिल्या विश्वविद्यालय और कुंद-कुंद ज्ञानपीठ मिलकर शोध कार्य को आगे बढ़ाएंगे : कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई ने प्राकृत भाषा शोध को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया


इंदौर के इतिहास में शनिवार और रविवार को धर्म, संस्कृति, भाषा, धर्मग्रंथ संरक्षण सहित विविध विषयों पर विद्वत चर्चाओं में पहली बार खुलकर व्यापक चर्चा कर शोध के लिए माहौल बनाने के संकल्प लिए गए। इंदौर से पढ़िए, विशेष रिपोर्ट…


इंदौर। इंदौर के इतिहास में शनिवार और रविवार को धर्म, संस्कृति, भाषा, धर्मग्रंथ संरक्षण सहित विविध विषयों पर विद्वत चर्चाओं में पहली बार खुलकर व्यापक चर्चा कर शोध के लिए माहौल बनाने के संकल्प लिए गए। अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज ने प्रबोधन में शोधार्थियों की सहायता के लिए उद्योग स्थापित कर उद्योगपतियों का आह्वान किया कि जैन धर्म, आगम और धर्म ग्रंथों के संरक्षण के लिए शोध की यह परंपरा को 100 गुनी करने के लिए सामाजिक दायित्व समीचीन हो गए हैं। द्वि दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में कुंद-कुंद ज्ञानपीठ के किए जा रहे प्रयासों की अतिथियों ने जमकर तारीफ की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि देवी विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई ने रविवार को संपन्न हुए पुरस्कार एवं सम्मान समारोह में कहा कि देवी अहिल्या विश्वविद्यालय और कुंद-कुंद ज्ञानपीठ दोनों मिलकर सिरि भूवलय ग्रंथ पर चल रहे शोध कार्यों को मिलकर कार्य करने की बात कही तो पूरा सदन करतल ध्वनि से गुंजायमान हो गया। उन्होंने डीएवीवी में जैन पाठ्यक्रम की शिक्षा आरंभ करवाने के लिए सभी विद्वतजनों के प्रयासों और सरकार की मंजूरी की खूब अनुमोदना की।

संस्मरण सुनाए और शोध कार्यों की सराहना

कार्यक्रम में एसजीएसआईटीएस के निदेशक डॉ.नीतेश पुरोहित ने संस्मरण सुनाते हुए कुंद-कुंद ज्ञानपीठ के स्कॉलर के शोध कार्यों की सराहना की। कार्यक्रम में पूर्व कुलगुरु डॉ. रेणु जैन, निदेशक डॉ. रजनीश जैन, इंजीनियर अनिलकुमार जैन, डॉ. संगीता मेहता, बाल ब्रह्मचारी डॉ. समता मारौरा उपस्थित रहे। इस अवसर पर नईदिल्ली के पूर्व कुल सचिव नलिन के शास्त्री ने प्राकृत भाषा के तकनीकी पक्षों का बिंदुवार सटीक सारगर्भित विवेचन किया। विद्याभूषण लोकमंगल न्यास के अध्यक्ष डॉ.जयकुमार उपाध्ये ने दो दिनों में पढ़े गए शोध पत्रों का सौदाहरण प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

सिरि भूवलय चक्र विवरणिका पुस्तक का विमोचन किया

सिरि भूवलय शोध एवं प्रशिक्षण केंद्र कुंद-कुंद ज्ञानपीठ और श्री दिगंबर जैन उदासीन आश्रम ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित सिरि भूवलय चक्र विवरणिका अनुभाग-1 मंगल प्राभृत अध्याय 1 से 11 तक पुस्तक का विमोचन अंतर्मुखी मुनि पूज्यसागर जी महाराज के सानिध्य में डीएवीवी के कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई सहित अन्य अतिथियों ने विमोचन किया। सद्य प्रकशित अनुभाग-2 का भी विमोचन किया।

शोधार्थियों का किया सम्मान

इस अवसर पर प्रथम पुरस्कार चौधरी आशा निर्मल जैन को प्रदान किया गया। यूएसए में रह रहे सुधांशु सालगरिया को द्वितीय पुरस्कार दिया गया। उनका यह पुरस्कार उनकी माताजी और भ्राता ने ग्रहण किया। तृतीय जयपुर की उमंग जैन को प्रदान किया। कार्यक्रम में अतिथियों का सम्मान ट्रस्ट अध्यक्ष अमित कासलीवाल, अरविंद जैन, डॉ. संगीता मेहता और अन्य अतिथियों ने किया। ट्रस्ट अध्यक्ष अमित कासलीवाल ने कुंद-कुंद ज्ञानपीठ की ऐतिहासिकता और गतिविधियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। जोशीला संचालन डॉ.अरविंदकुमार जैन ने किया। आभार ट्रस्ट अध्यक्ष अमित कासलीवाल ने माना।

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