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आर्यिका संघ का सिद्ध क्षेत्र की ओर अनवरत विहार: भोपाल में वर्षायोग समापन कर किया जा रहा है नासिक के लिए विहार 


रत्न मूंगे की नगरी मुंगावली मध्य प्रदेश की कोहिनूर 61 वर्षीय गणनी आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी, आर्यिका श्री विश्वयश मति जी और आर्यिका श्री विमल मति का पहली बार राजधानी भोपाल में प्रभावना पूर्ण वर्षायोग के बाद अब सिद्धों की राजधानी सिद्ध क्षेत्र की ओर विहार जारी है। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…


इंदौर। रत्न मूंगे की नगरी मुंगावली मध्य प्रदेश की कोहिनूर 61 वर्षीय गणनी आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी, आर्यिका श्री विश्वयश मति जी और आर्यिका श्री विमल मति का पहली बार राजधानी भोपाल में प्रभावना पूर्ण वर्षायोग के बाद अब सिद्धों की राजधानी सिद्ध क्षेत्र की ओर विहार जारी है। बुधवार को आष्टा से सिद्ध क्षेत्र नेमावर की ओर होकर दर्शन आराधना कर सिद्ध क्षेत्र सिद्धवरकूट दर्शन कर आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सहित 19 साधुओं की जन्म भूमि सनावद की ओर चल रहा हैं। गणिनि आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी के साथ आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षित आर्यिका श्री विश्वयश मति जी दीक्षा गुरु की जन्म भूमि सनावद को लेकर आह्लादित हैं। आर्यिकाश्री संघ का सनावद से सिद्ध क्षेत्र पावागिरी होते हुए सिद्ध क्षेत्र बावनगजा के लिए प्रभावना पूर्वक विहार होगा। पूज्य माताजी का संयमी जीवन का 31 का वर्षायोग वर्ष 2025 भोपाल में चातुर्मास के बाद आपका मंगल विहार वृहद पंच कल्याणक संत समागम के लिए णमोकार धाम नासिक की ओर चल रहा है। उल्लेखनीय हैं कि श्री सम्मेद शिखर, श्री महावीर जी, सोनागिर, देहली सहित अनेक धार्मिक क्षेत्रों पर निःशुल्क भोजन शाला सृष्टि मंगलम संस्था द्वारा संचालित है।

आर्यिका श्री सृष्टि भूषण जीः एक परिचय 

गुरु मां भक्त राजेश पंचोलिया ने बताया कि 23 मार्च 1964 को जन्मी सुलोचना दीदी ने सिद्ध क्षेत्र श्री सम्मेद शिखर जी में आचार्य श्री सुमति सागर जी और आचार्य श्री सम्मति सागर जी से 26 मार्च 1994 को आर्यिका दीक्षा ली और आर्यिका श्री सृष्टि भूषण जी नामकरण हुआ। 31 वर्ष के संयमी जीवन में 10 से अधिक राज्यों में भ्रमण कर धर्म की प्रभावना की। आपकी मंगल प्रेरणा से महाव्रती एवं अणु व्रती त्यागियों के लिए सृष्टि मंगलम संस्था के माध्यम से सिद्ध क्षेत्र सम्मेद शिखर जी, सोनागिर जी अतिशय क्षेत्र महावीर जी ,महानगर देहली में शुद्ध आहार की व्यवस्था चल रही हैं। आदि सृष्टि संस्था के माध्यम से कैंसर मरीजों तथा अन्य बीमारियों के इलाज कराए जाते हैं। 31 वर्ष के संयमी जीवन में 25 हजार से अधिक किमी का विहार किया है। 29 सितंबर 2019 को विश्व प्रसिद्ध संस्था ने मानव रत्न अलंकरण से देहली में विभूषित किया था।

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