आचार्य श्री विद्यासागर जी से जैन समाज तो प्रभावित था ही जैनेतर समाज और विदेशी नागरिक भी प्रभावित थे। मुनि श्री संभवसागर महाराज ने खजुराहो चातुर्मास का संस्मरण सुनाया। विदिशा से पढ़िए, यह खबर…
विदिशा। आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर जी महाराज से जैन समाज तो प्रभावित था ही जैनेतर समाज और विदेशी नागरिक भी प्रभावित थे। मुनि श्री संभवसागर महाराज ने 2008 खजुराहो चातुर्मास का संस्मरण सुनाते हुए कहा कि उधर, विदेशी पर्यटकों का बहुत आगमन हुआ, उसमें स्पेन और फ्रांसीसी थे। उन सभी के पास एक-दो कैमरा अवश्य रहते थे, वह कला पारखी थे। उन्होंने चारों दिशाओं के मंदिरों के समूह को देखा और उसकी बारीकियों को देखा और उसके फोटो भी लिए और गुरुदेव के दर्शन किए। उन्होंने शास्त्रों का अध्ययन तो नहीं किया था लेकिन, उन्होंने जब गुरुदेव को देखा तो वह देखते रह गए और वह आश्चर्य चकित थे।
उन्होंने पत्थर की मुद्रा तो बहुत देखी थी लेकिन, साक्षात वीतरागता की मुद्रा को देखा और दो-दो घंटे तक इस मुद्रा को देखते रहते थे। कभी आहार के समय तो कभी आचार्य श्री की सामायिक मुद्रा को देखा तो देखते रह गए। ठंड का मौसम था आचार्य श्री धूप में बैठे थे तो वह सैनानी आते और हाथ जोड़ते और टकटकी लगाए देखते रहते। यह जानकारी प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने दी।













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