मुज़फ्फरनगर के कल्पतीर्थ मठड्पम् में चल रहे श्री 1008 कलाद्रुम महामंडल विधान के दौरान आचार्य श्री विमर्श सागर जी ने तीर्थ संरक्षण हेतु 1008 “तीर्थ चक्रवर्ती” बनाने की घोषणा कर जैन समाज में नया उत्साह जगाया। श्रीफल साथी सोनल जैन की रिपोर्ट
मुज़फ्फरनगर। मुज़फ्फरनगर की धरती आज धर्म ऊर्जा से भर उठी। चल रहे आठ दिवसीय श्री 1008 कलाद्रुम महामंडल विधान के बीच आचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज ने तीर्थों के संरक्षण का महाआह्वान करते हुए कहा— “अब समय जागने का है — तीर्थ हमारी पहचान हैं।”
धर्म की विरासत के लिए ऐतिहासिक घोषणा
आचार्य श्री ने भावनात्मक स्वर में कहा—
> “भारत में 1008 तीर्थ चक्रवर्ती तैयार होंगे, जो तीर्थों की रक्षा और पुर्ननिर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।”
यह घोषणा होते ही सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ।
जिम्मेदारी का संकल्प
भारत वर्षीय तीर्थ क्षेत्र समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जंबू प्रसाद जैन, जवाहरलाल जैन और शरद जैन “सांध्य महालक्ष्मी” ने आचार्य श्री की प्रेरणा की सराहना करते हुए कहा— “लाल किले की तीर्थ रक्षा ज्योति से शुरू हुई जागरूकता की लौ अब राष्ट्र आंदोलन बनेगी।”
11 परिवार हुए आगे
समाज की प्रेरणा और भावनाओं का असर इतना गहरा था कि सभा में बैठे श्रद्धालुओं में से 11 जैन परिवार तुरंत आगे आए और “तीर्थ चक्रवर्ती” बनने का संकल्प लेकर इस ऐतिहासिक मुहिम की शुरुआत की।
आगामी कार्यक्रमों की झलक
30 नवंबर: कलाद्रुम महामंडल विधान का हवन और महाअर्चना।
1 दिसंबर: 35 पीछीधारी मुनियों के साथ मुज़फ्फरनगर में मंगल प्रवेश।
13 दिसंबर: 11 वर्ष बाद बड़ौत में आचार्य श्री का भव्य प्रवेश।
14 दिसंबर: बड़ौत में 28वां विमर्श संयमोत्सव एवं दिल्ली संघ द्वारा 100वां साप्ताहिक अभिषेक।













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