मुनिश्री संभवसागर जी ने रविवार को बच्चों से संवाद किया। उन्हें आचार्य श्री विद्यासागर जी से जुडे़ संस्मरण सुनाए। उन्होंने हिन्दी को अपनाने और हिन्दी माध्यम में शिक्षा पर जोर दिया। विदिशा से पढ़िए, यह खबर…
विदिशा। मुनिश्री संभवसागर जी ने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागरजी बच्चों को बहुत चाहते थे। उसी से संबंधित एक संस्मरण सुनाते हुए मुनि श्री संभव सागरजी ने कहा कि घटना 2019 की है। ग्रीष्म कालीन प्रवास दयोदय गौशाला जबलपुर में चल रहा था। दोपहर के समय आचार्य श्री आंगन में बैठे हुए थे कि कक्षा चार में पढ़ने वाला एक बच्चा आया और उसने आचार्य श्री को नमोस्तु किया। आचार्य श्री स्वाध्याय में लीन थे। उसने अपनी ड्राइंग की कॉपी और पेंसिल निकाली तथा आचार्य श्री के ठीक सामने बैठकर वह ड्राइंग करने लगा। गर्मी के दिन थे। गरम हवा चलने लगी थी, उस समय हम आचार्य श्री के पास गए और निवेदन किया कि बाहर लू चल रही है। अंदर कमरे में चलें तो आचार्य श्री ने बच्चे की ओर इशारा करते हुए कहा कि देखो उस बच्चे को डिस्टर्ब हो जाएगा और गुरुदेव वहीं बैठे रहे। हम उस बच्चे के पास पहुंचे हमने देखा कि उसने आचार्य गुरुदेव का बहुत ही सुंदर रेखांकित चित्र बनाया था। आचार्य श्री ने उस चित्र को देखा और उसे बहूत-बहूत आशीर्वाद दिया तो देखो बच्चों आचार्य गुरुदेव एक छोटे से छोटे बच्चे का बहुत ध्यान रखते थे।
बच्चे हिंदी लिखने तथा बोलने में कमजोर हो रहे हैं
मुनि श्री ने कहा कि आज विदिशा की सभी पाठशालाओं के बच्चे आए हैं तो बच्चों से प्रश्न करते हुए पूछा बताओ बच्चों भारत को भारत बोलना चाहिए या इंडिया? सभी बच्चों ने कहा कि ’भारत’ इस प्रकार मुनि श्री ने कहा कि आजकल के सभी माता-पिता अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में शिक्षा दिला रहे हैं। जिससे बच्चे अपनी मातृभाषा हिंदी को लिखने तथा बोलने में कमजोर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत का नाम पहले भी भारत ही था लेकिन, अंग्रेजों ने इसका नाम इंडिया कर दिया लेकिन, अब भारत को स्वतंत्र हुए 78 वर्ष बीत गए फिर भी हम गुलामी का प्रतीक इंडिया को बोल रहे हैं। आचार्य गुरुदेव ने हमेशा हिंदी भाषा और भारत को भारत बोलने और लिखने के लिये प्रेरित किया।
नई शिक्षा नीति में परिवर्तन का श्रेय गुरुदेव को
जब आचार्य श्री के पास प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति दर्शन करने आए तो आचार्य श्री ने उनको मातृभाषा हिंदी को प्रोत्साहित करने तथा भारत को भारत बोलने के संदर्भ में बात कही। आचार्य श्री से प्रेरित होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नई शिक्षा नीति के संदर्भ में नीति के प्रमुख कस्तूरी रंजन को आचार्य श्री से संपर्क करने के लिए कहा गया तो आचार्य श्री ने उनको नई शिक्षा नीति में हिंदी भाषा को प्राथमिकता के साथ शामिल करने तथा प्राथमिक शाला तक के सभी बच्चों को हिंदी में शिक्षा देने की बात कही। जिससे बच्चे प्राथमिक स्तर पर अपनी भाषा में मजबूत हो सके जिसे भारत सरकार ने स्वीकार कर नई शिक्षा नीति में जो परिवर्तन किया, उसका श्रेय गुरुदेव को जाता है।
अपनी मातृभाषा को मजबूत करें
मुनि श्री ने कहा कि हिंदी वर्णमाला में 52 अक्षर होते हैं जबकि, अंग्रेज़ी भाषा की वर्णमाला में 26 अक्षर होते हैं। उन्होंने कहा कि एक रिसर्च के अनुसार जो बच्चे अकेले अंग्रेजी भाषा का अध्यन करते हैं। उनके दिमाग का आधा हिस्सा ही काम करता है और जो बच्चे हिंदी भाषा के साथ अध्यन करते हैं उनका दिमाग पूरा काम करता है। एक बार आचार्य श्री ने बच्चों से पूछा- अच्छा बताओ, आपको सपना अंग्रेजी में आता है या हिंदी में? तो बच्चों ने कहा हिंदी में तो बच्चों भले ही आपके मम्मी-पापा अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा दिला रहे हैं, आप सभी अपनी मातृभाषा को मजबूत करने के लिए पाठशाला की दीदियों से धर्म की शिक्षा के साथ अपनी हिंदी वर्णमाला को भी मजबूत करें।
सभी पाठशालाओं के बच्चों ने उत्साह से भाग लिया
प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया रविवार का दिन होने से समग्र पाठशाला के सभी बच्चों तथा शिक्षा देने वाले सभी भैया एवं बहनों द्वारा आचार्य श्री विद्यासागरजी का संगीतमय पूजन किया। जिसे क्रमवार सभी पाठशालाओं के बच्चों ने उत्साह के साथ भाग लिया। प्रवचन उपरांत मुनि श्री निस्सीम सागरजी ने बच्चों से प्रवचन पर आधारित प्रश्न पूछ।े जिसका सही जबाब देने बाले बच्चों को पुरस्का देकर प्रोत्साहित किया एवं स्वल्पाहार कराया।













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