आचार्य श्री विद्यासागरजी के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज का दो दिवसीय प्रवास शीतलधाम में मिला। उनकी मंगल अगवानी करने के लिए मुनि श्री संभवसागर महाराज ससंघ पहुंचे तथा गुरु भाइओं के मंगल मिलन का दृश्य जब विदिशा वासियों ने देखा तो उनकी आंखें खुशी से सजल हो आई। विदिशा से पढ़िए, यह खबर…
विदिशा। आचार्य श्री विद्यासागरजी के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज का दो दिवसीय प्रवास शीतलधाम में मिला। उनकी मंगल अगवानी करने के लिए मुनि श्री संभवसागर महाराज ससंघ पहुंचे तथा गुरु भाइओं के मंगल मिलन का दृश्य जब विदिशा वासियों ने देखा तो उनकी आंखें खुशी से सजल हो आई। दयोदय महासंघ गुणायतन मध्यक्षेत्र के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ससंघ का मंगल प्रवास भोपाल चातुर्मास के उपरांत राहतगढ़ पंचकल्याणक के लिए हुआ है। जो 27 नवंबर से 2 दिसंबर के मध्य मुनिसंघ के सानिध्य में होना तय है। इस बीच विदिशा नगर में मुनिसंघ का दो दिवसीय प्रवास मुनि श्री संभवसागर महाराज ससंघ के साथ रहा और शीतलधाम में उत्सव का माहौल रहा।
जिन मंदिरों की वंदना करते हुए विहार किया
मुनि संघ ने आचार्य श्री विद्यासागरजी के आशीर्वाद से बनने जा रहे समवशरण मंदिर का अबलोकन किया एवं वर्तमान कमेटी को आचार्य श्री समय सागर महाराज एवं विदिशा में विराजमान मुनि श्री संभवसागर महाराज के निर्देशन में शीघ्र करने का आशीर्वाद प्रदान किया एवं देश भर के श्रद्धालुओं से अपील की कि विदिशा नगर ही वास्तविक भद्दिलपुर है। जिसका शास्त्रों में उल्लेख मिलता है तथा यही भगवान शीतलनाथ स्वामी की कल्याणक भूमि है। इसमें कोई संदेह नहीं हैं। उन्होंने तीन प्रमाणिक साक्ष्यों का भी उल्लेख किया। मंगलवार को प्रातः आहार चर्या के पश्चात दोपहर एक बजे मंगल विहार कर रास्ते में आने वाले जिन मंदिरों की वंदना करते हुए अपरान्ह तीन बजे श्री धर्मनाथ दिगंबर जैन मंदिर बंटीनगर पहुंचे एवं विश्व प्रसिद्ध शंका समाधान कार्यक्रम हुआ। इस अवसर पर प्रश्नकर्ताओं ने अपने प्रश्न पूछे एवं मुनि श्री ने उनकी शंकाओं का समाधान किया।
आत्महत्या जैसा जघन्य अपराध न करने का संकल्प दिलाया
एक प्रश्न के उत्तर में मुनि श्री ने कहा कि कैसी भी विपरीत परिस्थितियों में कभी भी आत्महत्या जैसा अपराध कभी नहीं करना चाहिए। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय तथा भारत एवं भारत से बाहर सुनने वाले सभी श्रद्धालुओं को आत्महत्या जैसा जघन्य अपराध न करने का संकल्प दिलाया। प्रातःकाल हुई धर्मसभा में मुनि श्री ने प्रभु और गुरु भक्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रभु और गुरु से परम प्रेम की अभिव्यक्ति ही भक्ति है। तुम्हारा प्रेम पामर प्रेम है ,यह प्रेम नहीं प्रेम का फ्रेम है। जब गुरु से निस्वार्थ भाव से प्रेम होता है, तभी सच्चे अर्थों में भक्ति प्रकट होती है। मुनि श्री ने कहा कि विदिशा वाले तो सभी भक्त है।
बुधवार को प्रवचन एवं आहार चर्या अतिशय क्षेत्र हिरनई में
मुनि श्री ने एक उदाहरण के माध्यम से गुरु भक्ति का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि यदि एक बार भक्ति की अभिव्यक्ति यदि हो गई तो वह मिटेगी नहीं। उन्होंने कहा भक्त कहलाना और भक्ति से भरने में बहूत अंतर है। एक बार भक्ति हृदय में जाग गई तो पूर्व संचित कर्म पल में नष्ट हो जाएंगे। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि सांयकाल मुनिसंघ का मंगल विहार होकर रात्रि विश्राम ओलम्पस स्कुल के पास एक मकान में हो रहा है तथा बुधवार को प्रातःकाल के प्रवचन एवं आहार चर्या अतिशय क्षेत्र ग्राम हिरनई में होगी। हिरनई में बांसल परिवार द्वारा सभी के भोजन की व्यवस्था की गई है। दोहपर वाद मुनिसंघ का मंगल विहार अटारी खैजड़ा में रात्रि विश्राम होकर गुरूवार प्रातःकाल के प्रवचन एवं आहार चर्या ग्यारस पुर अतिशयक्षेत्र में होगी।













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