शहर के महावीर नगर में नवीन जिनालय श्री 1008 शांतिनाथ जिनालय में आचार्य श्री सुनील सागर जी के तपस्वी शिष्य मुनिश्री सुमंत्र सागर जी के सानिध्य में 16 दिवसीय शांतिनाथ महामंडल विधान का प्रतिदिन आयोजन हो रहा है। दाहोद दिगंबर जैन समाज के सैकड़ों श्रावक-श्राविका इसमें धर्म लाभ ले रहे हैं। दाहोद से पढ़िए, राजेश जैन की यह खबर…
दाहोद। शहर के महावीर नगर में नवीन जिनालय श्री 1008 शांतिनाथ जिनालय में आचार्य श्री सुनील सागर जी के तपस्वी शिष्य मुनिश्री सुमंत्र सागर जी के सानिध्य में 16 दिवसीय शांतिनाथ महामंडल विधान का प्रतिदिन आयोजन हो रहा है। दाहोद दिगंबर जैन समाज के सैकड़ों श्रावक-श्राविका इसमें धर्म लाभ ले रहे हैं। सुबह 7 बजे से धार्मिक अनुष्ठान, पूजा, अभिषेक प्रारंभ किए जा रहे हैं। महाराज श्री द्वारा प्रवचन के अलावा भक्ति और संगीतमय वातावरण में प्रतिदिन विधान किए जा रहे हैं। जिसका लाभ समाज जन ले रहे हैं। शाम को गुरु भक्ति, आरती और स्वाध्याय चल रहे हैं। 16 दिन में लगभग विधान पूजा में श्रावकों द्वारा 2400 श्रीफल चढ़ाए जा रहे हैं।
यह विधान दाहोद के महावीर नगर जिनालय में 10 नवंबर से प्रारंभ किया गया। जिसमें प्रतिदिन दाहोद के श्रावक परिवार के साथ ही राणापुर, कुशलगढ़, बांसवाड़ा, मुंबई, नाथद्वारा, डूंगरपुर जैसे अन्य शहरों से श्रावक-श्रेष्ठी परिवार पुण्यार्जक बनकर धर्म लाभ ले रहे हैं। कार्यक्रम में 20 पंथी ट्रस्ट दाहोद और महावीर नगर महिला मंडल, महावीर नगर के परिवार की ओर से आयोजन किया जा रहा हैं। मुनि श्री सवा लाख मंत्रों से अभिषेक, शांतिधारा करवा रहे हैं तो सहस्त्र नामों से युक्त पंचामृत अभिषेक का लाभ भी श्रावकों को।मिल रहा है।
प्रतिदिन महराज श्री अलग-अलग विषयों पर प्रवचन कर रहे हैं। जिस कारण बड़ी संख्या में भक्तगण लाभ ले रहे हैं। रविवार के दिन महिला शक्ति, मातृ शक्ति की ताकत पर बोलते हुए कहा कि हमें हमारी माताओं को और सशक्त बनाना है। युवा दंपति गर्भपात न कराएं। चाहे 2-3बच्चे भी करने पड़े तो समाज हित का ही कार्य है किंतु ऐसा जघन्य पाप न करें। साथ ही महिलाएं जो बच्चादानी निकलवा देती हैं। वो भी बहुत बड़ा पाप है। ऐसी महिलाएं कभी तीर्थंकर की माता बनने के योग्य नहीं रहती।













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