आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी महाराज सानिध्य में जिन्होंने अपने वैवाहिक जीवन पूर्ण करने वाले दंपत्तियों का का सेमिनार रखा गया। यह आयोजन अपने आप में अलौकिक था। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर…
रामगंजमंडी। आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी महाराज सानिध्य में जिन्होंने अपने वैवाहिक जीवन पूर्ण करने वाले दंपत्तियों का का सेमिनार रखा गया। यह आयोजन अपने आप में अलौकिक था। आयोजन की शुरुआत में सर्वप्रथम म्यारा लुहाड़िया एवं ऐश्वी लुहाड़िया ने मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। आयोजन के क्रम में आचार्य श्री के चरणों का प्रक्षालन करने का सौभाग्य कमलकुमार रजत लुहाड़िया परिवार को प्राप्त हुआ। शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य सुनील अमिता सुरलाया परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर अष्ट द्रव्य के विशेष थाल सजाए गए। जो बहुत ही अलौकिक थे। साथ ही भक्ति में झूमते हुए सभी भक्तों ने आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज का पूजन किया।
इस बेला में मंदिर का वातावरण भक्ति से ओतप्रोत था। द्रव्य के थाल बहुत ही आकर्षक भव्य थे, जो आकर्षण का केंद्र बिंदु रहे। इस अवसर पर अखिल भारतीय विनिश्चय ग्रुप की ओर से किए गए कार्यक्रम सभी 50 वर्ष से अधिक वैवाहिक जीवन पूरे करने वाले युगल दंपती का सम्मान किया गया। उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। सभी ने अनुभव साझा किए और आचार्य श्री के सानिध्य को भी धन्य माना।
अपने अनुभव साझा कर सुखद जीवन के उदाहरण दिए
दंपत्त्यिों ने कहा कि परिवार में नोकझोक हो जाती है। फिर हम संभल जाते हैं, हमने सभी तीर्थ यात्रा पूर्ण की और परिवार में सब कुछ अच्छा है। गुरुदेव आपके द्वारा बताई गई बातों को भी हम अनुसरण करते हैं और अपने जीवन में उतारते है। साथ ही सभी को माला पगड़ी एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। साथ ही सभी ने अपनी जीवन के सुखद और धार्मिक जीवन के अनुभव साझा किए, जो अपने आप में प्रेरणादायक थे। इस आयोजन के प्रेरणा स्रोत मुनि श्री प्रांजल सागरजी महाराज रहे। संचालन सयानी विनायका एवं अदिति काला ने किया। इस अवसर पर समस्त अखिल भारतीय विनिश्चय ग्रुप के सदस्यों का भी सम्मान किया एवं उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।
महोत्सव पत्रिका का विमोचन किया गया
पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की पत्रिका का भी विमोचन किया गया। 8 नवंबर से होने वाले पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की पत्रिका का भी विमोचन हुआ। कार्यक्रम में सभी सहयोग देने वालों का भी विशेष रूप से सम्मान किया गया।
दांपत्य जीवन को 50 वर्ष गए हैं तो मोक्ष मार्ग अपनाएं
आचार्य श्री आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि किसी के शादी के 50 वर्ष पूर्ण हो गए। जीवन का आनंद है कि नोक झोक प्यार-व और धार्मिकता के साथ जिया जा रहा है। जीवन में झगड़ा और प्रेम जरूरी है। झगड़ा और प्रेम दोनों जरूरी है। प्रेम का मतलब होता है कि एक दूसरे का ध्यान रखना मन से ध्यान रखना होता है। यह तब होता है जब समर्पण की भावना होती है और एक दूसरे के कल्याण के मार्ग की भावना होती है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि शादी के 50 वर्ष पूर्ण हो गए हैं तो धर्म ध्यान का लक्ष्य होना चाहिए। यदि यह हो चुके हैं तो आप जीवन के अंतिम पड़ाव पर हैं। समझ लेना चाहिए। यदि 50 वर्ष पूर्ण हो गए हैं अच्छे से तो दोनों को एक साथ मोक्ष मार्ग पर जाना चाहिए। यह बहुत अच्छा होगा। आचार्य श्री विरागसागरजी का उदाहरण देते हुए कहा कि आचार्य श्री जब भी दीक्षाएं देते थे तो एक जोड़ा दंपती होता था। यदि आप सभी चीजों में एक साथ रहे तो मोक्ष मार्ग में भी एक साथ रहें। कार्यक्रम में नितिन सबदरा, शुभम जैन, स्वाति बागड़िया, रिदम चेलावत, सयानी विनायका, अदिति काला आदि का सहयोग रहा।













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