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अर्थ और काम पुरुषार्थ धर्म नीति अंधकार करे: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कर्मों के प्रतिफल के संबंध में विस्तार से बताया 


आचार्य श्री वर्धमान सागर जी आदर्श नगर श्री पारसनाथ जिनालय में संघ सहित विराजित हैं। प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान संघ सानिध्य में हो रहे हैं। प्रातःकाल श्री पारसनाथ भगवान के पंचामृत अभिषेक विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों ने किया। टोंक से पढ़िए, यह खबर…


टोंक। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी आदर्श नगर श्री पारसनाथ जिनालय में संघ सहित विराजित हैं। प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान संघ सानिध्य में हो रहे हैं। प्रातःकाल श्री पारसनाथ भगवान के पंचामृत अभिषेक विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों ने किया। धर्मसभा में आचार्य श्री ने बताया कि संसारी प्राणी को दुःख और सुख मिलते हैं। तीर्थंकर भगवान ने भी सुख और दुख भोगे हैं। किए गए कार्यों के आधार पर ही सुख-दुःख और शुभ और अशुभ फल मिलते हैं। कर्म सभी के उदय में आते हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने चार प्रकार के ध्यान, चार प्रकार के पुरुषार्थ, दर्शन विधि पर सरल भाषा में उपदेश दिया। गुरु भक्त राजेश पंचोलिया, समाज प्रवक्ता गजराज लोकेश, संजय संघी के अनुसार श्री पारसनाथ भगवान की पूर्व पर्याय मरुभूति और कमठकी पूर्व पर्याय के 10 भवों का वर्णन किया गया। कमठ ने मरुभूति पर उपसर्ग बैर कारण किया। जिसे मरुभूति के जीव ने क्षमा भाव सहित सहन किया। आर्त ध्यान कारण त्रियंच पर्याय मिलती हैं। मरूभूति हाथी के जीव ने मुनिराज के उपदेश से अणुव्रत धारण कर निर्दाेष पालन में अन्य जीवांे ने भी सहायता की। आचार्य श्री ने चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष पुरुषार्थ की विवेचना में बताया कि अर्थ और काम पुरुषार्थ धर्म नीति पूर्वक करना चाहिए। तभी सुख, शांति और पुण्य मिलता है। बिना धर्म पुरुषार्थ के मोक्ष प्राप्त नहीं होता हैं।

सहस्त्रनाम विधान 28 को 

भगवान के दर्शन भक्ति उत्साह से ठीक उसी प्रकार करना चाहिए। जैसे आसमान में मेघो की गर्जना वर्षा से मयूर प्रसन्न होकर नृत्य करता है। धार्मिक कार्य भगवान के दर्शन अभिषेक पूजन करने का अवसर पुण्य और सौभाग्य से मिलता है। शास्त्रों में बताया हैं कि मंदिर श्री जी के दर्शन की इच्छा होने से मंदिर में भगवान के विकल्प रहित दर्शन करने तक अनेकों उपवासों का पुण्य शुभ फल मिलता है। तप उपवासों से कर्मों की निर्जरा होती है। शाम को श्री जी और आचार्य श्री की आरती के बाद मुनि श्री हितेंद्रसागर जी द्वारा छहढाला की कक्षा ली जाती हैं। आचार्य श्री के सानिध्य मे आदर्श नगर में सहस्त्रनाम विधान 28 अक्टूबर दोपहर 1 बजे से होगा। आज सलूंबर नगर के सैकड़ों भक्तों ने आचार्य श्री के दर्शन किए।

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