दिगंबर जैन समाज के लिए एक अत्यंत गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक अवसर आने वाला है। आचार्य विभव सागर महाराज के पावन सान्निध्य में आगामी 2 नवंबर को गोमटगिरी तीर्थक्षेत्र पर 10 जैनेश्वरी दीक्षाएँ संपन्न होंगी। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। दिगंबर जैन समाज के लिए एक अत्यंत गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक अवसर आने वाला है। आचार्य विभव सागर महाराज के पावन सान्निध्य में आगामी 2 नवंबर को गोमटगिरी तीर्थक्षेत्र पर 10 जैनेश्वरी दीक्षाएँ संपन्न होंगी। यह समारोह दोपहर 12 बजे से प्रारंभ होगा।
इससे पूर्व 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को विविध धार्मिक अनुष्ठान, आत्मशुद्धि तथा आराधनात्मक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। प्रचार-प्रसार संयोजक रेखा जैन और कार्यक्रम संयोजक आकाश पांड्या ने बताया कि इस विशेष दीक्षा में 9 महिलाएँ और 1 पुरुष गृहस्थ जीवन का त्याग कर संयममार्ग को अपनाएँगे। दीक्षा स्थल पर इंदौर में विराजमान अनेक संतों का पावन सान्निध्य रहेगा।
संयम, त्याग और आत्मकल्याण की अनूठी यात्रा
इस दीक्षा समारोह में सबसे वरिष्ठ दीक्षार्थी कोकिलाबेन (जन्म 2 सितंबर 1950, अहमदाबाद) होंगी, जबकि सबसे कनिष्ठ राजश्री गुड़िया (जन्म 10 अप्रैल 1995, छिंदवाड़ा) होंगी।
दीक्षार्थियों के नाम इस प्रकार हैं —
क्षुल्लिका आराधना श्री (10 अगस्त 1977), ब्रह्मचारी सुनील जैन (19 दिसंबर 1967), ब्रह्मचारिणी राजश्री दीदी (10 अप्रैल 1995), ब्रह्मचारिणी मीनू दीदी (6 जुलाई 1976), ब्रह्मचारिणी ट्विंकल दीदी (7 सितंबर 1992), ब्रह्मचारिणी जयश्री दीदी (9 सितंबर 1961), ब्रह्मचारिणी रेखा दीदी (1962), ब्रह्मचारिणी सविता दीदी (1 सितंबर 1968), ब्रह्मचारिणी कोकिलाबेन (2 सितंबर 1950), ब्रह्मचारिणी चंद्रकला देवी (7 नवंबर 1957)।
दीक्षा का महत्व
जैनेश्वरी दीक्षा के पश्चात दीक्षित व्यक्ति घर-परिवार, संपत्ति और सांसारिक संबंधों का पूर्ण त्याग करते हैं। वे केवल संयम का प्रतीक पिच्छी, शुद्धि का प्रतीक कमंडल और ज्ञान का प्रतीक शास्त्र अपने पास रखते हैं। दीक्षित साधु-साध्वी जीवन भर पैदल विहार करते हैं तथा अंजलि बनाकर आहार ग्रहण करते हैं। यह दीक्षा समारोह न केवल त्याग और संयम का जीवंत प्रतीक है, बल्कि आत्मा की मुक्ति और मोक्षमार्ग की दिशा में एक महान आध्यात्मिक यात्रा का आरंभ भी है।













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