आचार्य डॉ. विभवसागर जी मुनिराज के 50वें स्वर्ण विभव महोत्सव पर भारतीय डाक विभाग इंदौर ने विशेष डाक आवरण जारी किया। यह आवरण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जैन संस्कृति का गौरव बढ़ाएगा। पढ़िए ओम पाटोदी की रिपोर्ट…
इंदौर। भारतीय डाक विभाग के इंदौर परिक्षेत्र द्वारा परमपूज्य श्रमणाचार्य डॉ. विभवसागर जी मुनिराज के 50वें अवतरण दिवस के पावन अवसर पर एक विशेष आवरण (Special Postal Cover) का विमोचन किया गया। यह ऐतिहासिक विमोचन कार्यक्रम जीपीओ इंदौर के फिलेटली ब्यूरो में प्रवर अधीक्षक शिवांशु कुमार के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री रमेश जैन, कैलाश वेद एवं इंद्र कुमार सेठी उपस्थित रहे।
इस समारोह का संयोजन वरिष्ठ डाक टिकट संग्राहक जयंत डोसी ने श्रीनिवास जोशी के मार्गदर्शन में किया। श्री शिवांशु कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह विशेष आवरण केवल भारत में ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय डाक टिकट प्रदर्शनियों में भी जैन संस्कृति का गौरव बढ़ाएगा। विशिष्ट अतिथि कैलाश वेद ने आचार्य श्री की रचनाओं, विशेषकर ‘समाधि भक्ति’ एवं ‘पर्यावरण महाकाव्य’ की महिमा का वर्णन किया तथा उसी की प्रति मुख्य अतिथि को भेंट की गई।
अब तक 100 से अधिक आगम ग्रंथों का सृजन
वरिष्ठ डाक टिकट संग्रहक एवं वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के प्रतिनिधि ओम पाटोदी ने बताया कि आचार्य विभवसागर जी का जन्म 23 अक्टूबर 1976 को किशनपुरा (मप्र) में हुआ तथा 31 मार्च 2007 को औरंगाबाद में आचार्य पद पर आसीन हुए। उनके द्वारा अब तक 100 से अधिक आगम ग्रंथों का सृजन किया जा चुका है और 62 से अधिक दीक्षाएँ प्रदान की जा चुकी हैं। कार्यक्रम में जैन समाज व फिलेटली जगत से बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन उर्मिला सैनी ने किया एवं सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया।













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