नवागढ़ अतिशय क्षेत्र में भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण महोत्सव क्षेत्र संचालक जयकुमार निशांत भैयाजी के सान्निध्य में भक्ति, अनुष्ठान और प्रेरक प्रवचन के साथ मनाया गया, जिसमें सामूहिक निर्वाण लाडू समर्पण हुआ। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…
नवागढ़। प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र नवागढ़ में भगवान महावीर स्वामी जी का निर्वाण महोत्सव बड़े ही श्रद्धा, भक्ति और भव्यता के साथ क्षेत्र संचालक प्रतिष्ठाचार्य जयकुमार निशांत भैयाजी के सान्निध्य में, क्षेत्र कमेटी एवं स्थानीय समाजजनों के सहयोग से संपन्न हुआ।
सम्माननीय अतिथि के रूप में ये रहे उपस्थित
इस अवसर पर अध्यक्ष सनत कुमार जैन एडवोकेट, महामंत्री वीरचंद्र जी, कोषाध्यक्ष इंद्र कुमार जी, मंत्री अशोक कुमार जैन, उपाध्यक्ष कपूर चंद्र ढूंढा, राकेश कुमार जैन ककरवाहा, आनंदीलाल जैन लुहर्रा, सुरेंद्र जी सहित पंडित मनीष जैन संजू टीकमगढ़, पंडित अजीत शास्त्री बड़ागांव, पंडित सोमचंद मैनवार, पंडित कैलाश चंद्र, अंकित जैन सोजना, विकास जैन नेकोरा एवं पंडित रवि जैन शास्त्री उपस्थित रहे।
संगीतमय अनुष्ठान में भाव विभोर हुए लोग
भक्तिमय वातावरण में भगवान अरनाथ जी का अभिषेक, शांतिधारा एवं विधान पूजन अत्यंत भावपूर्ण लयबद्ध भजनों के साथ सम्पन्न हुआ। तत्पश्चात सभी श्रद्धालुओं ने भगवान को निर्वाण लाडू भक्ति भाव से अर्पित किए। मुख्य निर्वाण लाडू का सौभाग्य पुष्प परिवार टीकमगढ़, आनंदीलाल जैन, राकेश कुमार जैन, प्रशांत कुमार बच्चू, कपूर चंद जी ढूंढा, तेजाराम जी पठया एवं अशोक कुमार जी कपासिया को प्राप्त हुआ।
उद्बोधन : भगवान महावीर स्वामी का जीवन मानवता, करुणा और आत्मसंयम का अद्वितीय संदेश
क्षेत्र निर्देशक ब्रह्मचारी जय निशांत जी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि भगवान महावीर स्वामी का जीवन मानवता, करुणा और आत्मसंयम का अद्वितीय संदेश है। यदि हम अहिंसा, सत्य व अपरिग्रह को जीवन में उतारें, तो समाज में स्थायी शांति और आत्मकल्याण संभव है। महामंत्री वीरचंद्र जी ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महावीर स्वामी का जीवन केवल धार्मिक उदाहरण नहीं, बल्कि मानव जीवन की सच्ची दिशा है।
अंत में क्षेत्र कोषाध्यक्ष इंद्र कुमार जी ने सभी श्रद्धालुओं, समाजजनों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन केवल उत्सव न होकर आत्मशुद्धि और धर्म जागरण के माध्यम हैं। उन्होंने नवागढ़ क्षेत्र की पवित्रता को बनाए रखने के लिए समाज की धर्मनिष्ठ एकता की आवश्यकता पर बल दिया।













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