मुरैना के बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज ने धर्मसभा में कहा कि केवल ज्ञान को रटने या बोलने से कुछ नहीं होता, उसे आत्मसात करना आवश्यक है। मुनिश्री ने समझाया कि ज्ञान और चारित्र दोनों मोक्ष के साधन हैं — ज्ञान बोलता है पर चारित्र मौन रहकर सिखाता है। पढ़िए मनोज जैन नायक की ख़ास खबर…
मुरैना। बड़ा जैन मंदिर में सैद्धांतिक ग्रंथ समयसार की वाचना के दौरान जैन संत मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि आज मनुष्य ज्ञान अर्जित तो कर रहा है परंतु उस पर अमल नहीं करता। केवल शास्त्रों, कथाओं या रामायण का अध्ययन कर लेने से आत्मकल्याण संभव नहीं है, जब तक मनुष्य उन सिद्धांतों को अपने जीवन में नहीं अपनाता।
मुनिश्री ने कहा कि आज लोग “रट्टू तोते” बन गए हैं जो केवल धर्म की बातें करते हैं पर उसका पालन नहीं करते। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सभी जानते हैं कि असत्य, चोरी या हिंसा करना पाप है, फिर भी इनसे दूर नहीं रहते। यही कोरा ज्ञान है, जो व्यक्ति के आचरण में नहीं उतरता। उन्होंने कहा कि “ज्ञान बोलता है और चारित्र मौन रहता है,” क्योंकि ज्ञान को केवल कहा जाता है, जबकि चारित्र अपने आचरण से सिखाता है।
उन्होंने आगे कहा कि सच्चे साधु-संत वही हैं जो अपने जीवन से धर्म के सिद्धांतों का पालन करते हैं। उनके मौन आचरण का प्रभाव उपदेशों से अधिक होता है। जैन दर्शन में ज्ञान और चारित्र का गहरा संबंध है — ज्ञान आत्मा का स्वभाव है और चारित्र उस ज्ञान को प्रकट करने का साधन।
इस अवसर पर मुनिश्री विबोधसागर जी महाराज ने भी धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि “कोरा ज्ञान किसी काम का नहीं होता।” उन्होंने बताया कि सफलता और मोक्ष की प्राप्ति तभी संभव है जब ज्ञान को व्यवहार में लाया जाए। धन और स्वास्थ्य की हानि तो वापस मिल सकती है, लेकिन चरित्र खो जाए तो सब कुछ नष्ट हो जाता है।
तीन रत्न — जीवन के सच्चे आधार
मुनिश्री ने कहा कि जैन दर्शन के अनुसार मोक्ष मार्ग के तीन रत्न — सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र — जीवन के सच्चे आधार हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि ज्ञान को केवल बोलें नहीं, बल्कि उसे आत्मसात करें, तभी जीवन का कल्याण संभव है। धर्मसभा में नगर के अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे जिन्होंने संतों के प्रवचनों को श्रवण कर आत्मविकास का संकल्प लिया। मुरैना जैन समाज के तत्वावधान में समयसार वाचना का यह आध्यात्मिक क्रम निरंतर जारी है, जिसमें प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं सहभागी हो रही हैं।













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