गोमटगिरि अतिशय क्षेत्र के लगभग 40 वर्षों के इतिहास में पहली बार जिनेश्वरी दीक्षा आयोजित की जा रही है। आचार्य श्री विभव सागर जी ने इंदौरवासियों से इस दीक्षा की अनुमोदना का लाभ लेने का आह्वान किया। आगामी 30 अक्टूबर को पिच्छिका परिवर्तन, 1 नवम्बर को स्वर्णिम जन्म दिवस और 2 नवम्बर को जिनेश्वरी दीक्षा के कार्यक्रम आयोजित होंगे। पढ़िए ओम पाटोदी की रिपोर्ट…
इंदौर। समाधि भक्ति के प्रणेता आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज ने समर्थ सिटी में अपने अल्प प्रवास के दौरान कहा कि दीक्षा मानव जीवन का सर्वोच्च अवसर है। मानव जीवन की सार्थकता इसी में है कि दीक्षा ग्रहण की जाए और यदि कोई व्यक्ति दीक्षा नहीं ले सकता तो कम से कम दीक्षा की अनुमोदना जरूर करे। साधु जीवन की सार्थकता इस प्रक्रिया में निहित है।
इस वर्ष गोमटगिरि अतिशय क्षेत्र में पहली बार जिनेश्वरी दीक्षा सम्पन्न होने जा रही है। पश्चिम क्षेत्र की 9 जिनेश्वरी सहयोगियों के माध्यम से यह अवसर भव्य रूप से मनाया जाएगा। आगामी कार्यक्रम के अनुसार, 30 अक्टूबर को पिच्छिका परिवर्तन का आयोजन होगा, 1 नवम्बर को स्वर्णिम जन्म दिवस और 2 नवम्बर को बहुप्रतीक्षित जिनेश्वरी दीक्षा का भव्य आयोजन होगा।
वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी ने बताया कि आचार्य श्री के प्रवचन से पूर्व गुरु के आदेश का पालन करते हुए समर्थ सिटी में आर्यिका सिद्ध श्री माताजी ने संक्षिप्त संदेश दिया। शाम को समर्थ सिटी परिवार शैलेश चंदेरिया के नेतृत्व में गांधी नगर से आचार्य संघ को लेने पहुंचे और मंगल प्रवेश में महिला मंडल, बालक- बालिका मंडल एवं आर्यिका सिद्ध श्री माताजी के साथ भव्य स्वागत किया।
आचार्य श्री विभव सागर जी ने उपस्थित सभी लोगों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि दीक्षा ग्रहण करना और अनुमोदना करना दोनों ही पुण्यकारी हैं। उन्होंने इंदौरवासियों से अपील की कि अधिक से अधिक लोग इस अवसर की अनुमोदना में भाग लें ताकि पुण्य और साधना का लाभ सभी तक पहुंचे। इस प्रकार गोमटगिरि का यह आयोजन क्षेत्रीय जैन समाज के लिए ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायक अवसर साबित होगा।













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