जिनशासन इतना समृद्ध और सक्षम है कि मंत्रों के माध्यम से भी हम शांति, संयम और साधना के मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं। यह विचार आचार्यश्री विश्वरत्नसागर जी महाराज ने वीआईपी रोड स्थित दलाल बाग में चल रहे चातुर्मासिक अनुष्ठान में महा मांगलिक को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…सा्र्रेत साभार दैनिक भास्कर…
इंदौर। मनुष्य जीवन में कई तरह के घटनाक्रम आते-जाते रहते हैं। भारत के संत और विद्वान हमेशा समाज कल्याण और दीन, दुःखी और दरिद्रों की भलाई का चिंतन करते हैं। महा मांगलिक ऐसा दिव्य अनुष्ठान है, इसके श्रवण और मनन-मंथन से मानव मात्र को आधि, व्याधि एवं उपाधि जैसे अनेक रीोगों से मुक्ति मिल जाती है। जिनशासन इतना समृद्ध और सक्षम है कि मंत्रों के माध्यम से भी हम शांति, संयम और साधना के मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं। यह विचार आचार्यश्री विश्वरत्नसागर जी महाराज ने वीआईपी रोड स्थित दलाल बाग में चल रहे चातुर्मासिक अनुष्ठान में महा मांगलिक को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
चातुर्मास संयोजक पुण्यपाल सुराना, कैलाश नाहर, ललित सी. जैन, मनीष सुराना, दिलसुखराज कटारिया, प्रीतेश ओस्तवाल, दिलीप मंडोवरा, दीपक सुराना, सुनील जैन आदि ने आचार्यश्री की अगवानी की। महा मांगलिक के लाभार्थी दिलीपकुमार केवलचंद खूबाजी परिवार थे। धर्मसभा में मुनिश्री मृदुरत्नसागर जी, मुनिश्री कीर्तिरत्नसागर जी और मुनिश्री उत्तमसागर जी महाराज ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे।













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