88 वर्षीय क्षपक मुनि श्री 108 चिन्मय सागर जी ने 13 सितंबर को आहार का त्याग कर यम संलेखना आरंभ की थी। पढ़िए राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट…
टोंक। परम पूज्य वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज के निर्यापकत्व में क्षपक मुनि श्री 108 चिन्मय सागर जी ने यम संलेखना में प्रवेश कर समाधिमरण किया। 13 सितंबर 2025 को मुनि श्री ने चारों प्रकार के आहार का त्याग कर तप की गहन साधना आरंभ की थी। तीन उपवास के बाद 16 सितंबर को उन्होंने आचार्य श्री के श्रीमुख से अरिहंत–सिद्ध का उच्चारण सुनते हुए सम्यक समाधि मरण प्राप्त किया।
समाधिस्थ मुनि श्री की डोला विमान यात्रा 16 सितंबर की शाम को समाधिस्थल ले जाई जाएगी, जहां विधिपूर्वक अभिषेक, पूजन और अग्नि संस्कार संपन्न होंगे। समाजभर में मुनि श्री के समाधिमरण का समाचार फैलते ही श्रद्धालुओं में गहन शोक और भक्ति का वातावरण बन गया।













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