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जब हम सभी से क्षमा मांगते हैं तो भगवान प्रसन्न होते हैं: दसाधिक उपवास करने वाले तपस्वियों का सम्मान 


विजयनगर स्थित पंच बालयति मंदिर में रविवार को श्री दिगंबर जैन समाज की सामूहिक क्षमावाणी कार्यक्रम हुआ। इसमें समाजजनों ने एक-दूसरों से उत्तम क्षमा मांगी। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…


इंदौर। विजयनगर स्थित पंच बालयति मंदिर में रविवार को श्री दिगंबर जैन समाज की सामूहिक क्षमावाणी कार्यक्रम हुआ। इसमें समाजजनों ने एक-दूसरों से उत्तम क्षमा मांगी। इस अवसर पर आयोजक राहुल जैन केसरी, सुरेश भैया, जिनेश भैया ने बताया कि दी प्रज्वलन नवीन गोधा, हर्ष जैन, सुरेंद्र बाकलीवाल, सचिन जैन, मुकेश पटौदी, प्रदीप बड़जात्या, कमल रांवका आदि ने किया। संचालन सुरेश भैया और प्रदीप शास्त्री ने किया। कार्यक्रम में मंगलाचरण के बाद इंदौर के सभी मंडलों द्वारा आचार्यश्री की पूजा की गई। 10 या इससे अधिक उपवास करने वाले तपस्वियों और राजेश मंगल का सम्मान भी किया गया। चार हजार से अधिक समाजजन ने वात्सल्य भोज किया। भोज पुण्यार्जक परिवार गजेंद्र माया जैन, गौतम जैन, गौरव जैन, गिरीश जैन आदि रहे। धर्मेंद्र जैन, प्रकाश अभिनंदन, डीके जैन, प्रदीप शास्त्री, राजीव निराला, विनोद जैन, अक्षय कासलीवाल, आरके जैन, दिनेश जैन और महावीर जैन आदि समाजजनों ने व्यवस्थाओं को संभाला।

आचार्यश्री विनम्रसागर जी का मंगल उद्बोधन हुआ

पंच बालयति मंदिर में आचार्यश्री विनम्र सागर जी महाराज ने क्षमावाणी कार्यक्रम में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि हम भगवान से क्षमा मांगते हैं तो सारे लोग प्रसन्न हो जाते हैं और जब हम सभी लोगों से क्षमा मांगते हैं तो भगवान प्रसन्न हो जाते हैं। हंसता हुआ चेहरा हमारी शान बढ़ाता है और हंसकर किया गया कार्य हमारी पहचान बन जाता है। चोट देकर माफी मांगना आसान है, लेकिन चोट खाकर क्षमा करना बहुत कठिन है। आचार्यश्री ने कहा कि क्षमा करने से हमारा अतीत तो नहीं बदलता लेकिन, वर्तमान को सुंदर और भविष्य को सुनहरा बनाया जा सकता है। क्षमा मांगने वाला बहादुर होता है और क्षमा करने वाला महावीर। वाणी से यदि फूल झरें और अमृत घुले तो वह जीवन और व्यक्तित्व दोनों को निखार देती है।

17 सितंबर से पूजन प्रशिक्षण शिविर 

पंच बालयति मंदिर विजयनगर में 17 से 26 सितंबर तक प्रतिदिन शाम 6 से 9.30 बजे तक पूजन प्रशिक्षण शिविर एवं आनंदोत्सव मनाया जाएगा। शिविर में बच्चे, युवा और बड़ों को पूजन विधि और शास्त्रीय पद्धतियां सिखाई जाएंगी। पूजन के साथ-साथ भक्ति, संस्कृति और शिखर पर ले जाने वाला अद्भुत संगम होगा।

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