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लोगों को हर तरह से खूबसूरत होना चाहिए : आचार्य प्रसन्न सागर जी ने व्यक्तित्व निर्माण पर प्रभावी बात कही


आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय श्री पियूष सागरजी महाराज ससंघ तरुणसागरम तीर्थ पर वर्षायोग हेतु विराजमान हैं। उनके सानिध्य में वहां विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हो रहे हैं। कोडरमा से पढ़िए, जैन राजकुमार अजमेरा और मनीष सेठी की खबर…


तरुणसागरम तीर्थ/कोडरमा। आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय श्री पियूष सागरजी महाराज ससंघ तरुणसागरम तीर्थ पर वर्षायोग हेतु विराजमान हैं। उनके सानिध्य में वहां विभिन्न धार्मिक

कार्यक्रम संपन्न हो रहे हैं। उसी श्रृंखला में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने बताया कि लोगों को हर तरह से खूबसूरत होना चाहिए। चेहरे से, चरित्र से, विचार से, पहनावे से, खान पान से,ओर अन्तरात्मा से

जीवन में किसी चीज की मात्रा बढ़ाना चाहते हैं तो उसके कारण को खोजो, जिन कारणों से मन की शान्ति और चेहरे की प्रसन्नता बढ़ रही हो, उन कारणों की मात्रा को बढ़ाते जायें और जिन कारणों से मन की शान्ति, चेहरे की चमक, आपस में प्रेम-मैत्री, सदभाव कम हो रहा हो, तो उन कारणों की मात्रा कम करते जाओ। क्योंकि आज जो आप हैं या आगे जो होंगे, वह सकारात्मक सोच का ही परिणाम होगा। इसलिए सोच बदलो तो जीवन आपोआप बदल जायेगा।

कभी भी अपने आपको 100% सही नहीं समझें। जब कभी आप अपनी बात को परोसें या अपना चिन्तन अपनों से साझा करें तो ये जरूर कहें कि हम भी गलत हो सकते हैं। फिर देखो आपकी बात का वजन कैसे बढ़ता है और सामने वाले पर उसका कैसा अद्भुत प्रभाव पड़ता है। हम अपने जैसे लोगों को ही पसंद क्यों करते हैं? जब हम किसी को अपने कार्यों की नकल करते देखते हैं, तो अच्छा महसूस करते हैं। किसी को अपनी बात दोहराते हुए सुनते हैं तो मन खुश हो जाता है। हम अपने जैसे लोगों को पसंद करते हैं। जब आप किसी से बोलते हैं कि मै आपको बहुत पसंद करता हूँ, तब कहने वाले का मकसद होता है मैं आपके जैसा ही हूँ। खान-पान, रहन-सहन, वाणी-व्यवहार, विचारों की विराटता, मन की उदारता और अंतरात्मा से आपके जैसा ही हूँ। आपकी एक स्माइल लोगों की जिन्दगी बदल सकती है और मन की स्मेल को दूर भगा सकती है। यदि कोई बहुत तनाव में है या चिन्ताओं से घिरा हुआ है तो आपकी एक मुस्कुराहट बता सकती है कि तनाव और चिन्ता किसी समस्या का समाधान नहीं है। चेहरे की प्रसन्नता बतलाती है कि दुनिया खुश गवार है। क्योंकि मुस्कुराने से हमारा कुछ भी नहीं जाता, ना इन्कम टेक्स, ना सेल्स टेक्स, ना जी एस टी, ना इ.डी की रेड ये सब फ्री है, इसलिए अपनी मुस्कुराहट को मत मरने दो। कौन क्या कर रहा है, क्यों कर रहा है, कब कर रहा है, इन सब से हम जितना दूर रहेंगे, चेहरे की प्रसन्नता उतनी ही ऊर्जावान और ओजपूर्ण होती जायेगी।

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