ललितपुर के अभिनंदनोदय तीर्थ में आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज ने ब्रह्मचर्य और व्रतों के महत्व पर प्रकाश डाला। पर्यूषण पर्व के समापन अवसर पर उन्होंने जीवन में संस्कारों, समाज की एकता और परमार्थ के कार्यों पर जोर दिया। श्रद्धालुओं ने व्रत-उपवास रखकर भगवान वासुपूज्य का निर्वाण कल्याणक मनाया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
ललितपुर। अभिनंदनोदय तीर्थ में पर्यूषण पर्व के समापन अवसर पर आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज ने श्रावकों को ब्रह्मचर्य, संयम और धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ब्रह्मचर्य न केवल शरीर की शुद्धि करता है, बल्कि मन और विचारों को भी निर्मल बनाता है।
धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के मार्गदर्शन में व्रत-उपवास और ध्यान साधना का पालन किया। आचार्य श्री ने जीवन में संयम के महत्व को समझाते हुए कहा कि यदि व्यक्ति अपने इच्छाओं और भावनाओं पर नियंत्रण रखता है, तो उसका जीवन समाज और परिवार के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है।
अनंतचतुर्दशी के इस पावन अवसर पर अभिनंदनोदय तीर्थ में विशेष कलशाभिषेक और महामस्तकाभिषेक समारोह आयोजित किया गया। मंदिर परिसर में मंत्रोच्चारण, भजन-कीर्तन और प्रवचन का वातावरण भक्तिमय बना रहा। छोटे-बड़े सभी श्रद्धालु इस धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होकर अपनी आस्था व्यक्त करते रहे।
निर्वाण कल्याणक का सम्मानपूर्वक आयोजन
मंदिर कमेटी ने भीड़ और व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखते हुए सुरक्षा और संयमित आयोजन सुनिश्चित किया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान वासुपूज्य के निर्वाण कल्याणक का सम्मानपूर्वक आयोजन किया। आचार्य श्री के उपदेशों से सभी भक्तों के हृदय में भक्ति, आध्यात्मिक जागरूकता और जीवन में नैतिकता का संदेश प्रबल हुआ। पर्यूषण पर्व के इस समापन समारोह ने जैन धर्म की उच्च शिक्षाओं, धार्मिक परंपरा और समाज में संयम और सेवा की भावना को उजागर किया। आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज के मार्गदर्शन में श्रद्धालु अपने जीवन में धर्म, संयम और आध्यात्मिक साधना को अपनाने के लिए प्रेरित हुए।













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