अंबाह में सुगंध दशमी पर्व पर भक्तों ने मंदिरों में धूप अर्पित की और महिलाओं ने उपवास रख संयम साधना की। पंडित आयुष शास्त्री ने प्रवचन देकर संयम धर्म का महत्व बताया। रात को सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रश्नमंच और लकी ड्रा ने आयोजन को यादगार बना दिया। पढ़िए अजय जैन की खास रिपोर्ट…
अंबाह। जैन समाज में पर्युषण पर्व केवल साधना ही नहीं बल्कि समाज को एकजुट करने और संस्कृति को संरक्षित करने का अवसर भी है। इसी क्रम में मंगलवार को अंबाह के जैन मंदिरों में सुगंध दशमी पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया।
प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। भक्तों ने भगवान की प्रतिमाओं के समक्ष सुगंधित धूप अर्पित की। महिलाओं ने निराहार रहकर उपवास किया और संयम की साधना से धर्म लाभ लिया। उन्होंने बताया कि उपवास जीवन में आत्मिक शांति, अनुशासन और दृढ़ता का संचार करता है।
गुना से पधारे पंडित आयुष शास्त्री ने प्रवचन में कहा कि पर्युषण पर्व आत्मशुद्धि और संयम का पर्व है। संयम केवल आहार में नहीं बल्कि विचार, वाणी और आचरण में भी होना चाहिए। जैसे धूप वातावरण को सुगंधित करती है वैसे ही संयम आत्मा को निर्मल बनाता है।
पार्सिंग द पार्सल” खेल, प्रश्नमंच और लकी ड्रा
शाम को आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बच्चों और युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। “पार्सिंग द पार्सल” खेल, प्रश्नमंच और लकी ड्रा ने कार्यक्रम को रोचक और मनोरंजक बनाया। प्रश्नमंच प्रतियोगिता में बच्चों और युवाओं ने धार्मिक और सामान्य ज्ञान से सबका मन मोह लिया।
विजेताओं को आकर्षक पुरस्कार :
पुरस्कार वितरण का दायित्व नीलम जैन एवं महेश चंद जैन (झाबुआ) परिवार ने निभाया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में अनुशासन और भाईचारे को प्रबल करते हैं। इस प्रकार, सुगंध दशमी पर्व अंबाह में धार्मिक साधना और सांस्कृतिक गतिविधियों का अद्भुत संगम बनकर यादगार बन गया।













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