मुरैना में पर्युषण पर्व के छठे दिन धूप दशमी पर्व बड़े श्रद्धा भाव से मनाया गया। जैन संत विबोधसागरजी महाराज ने प्रवचन में संयम साधना को जीवन का सार बताया, वहीं महिलाओं ने सुहाग की मंगलकामना करते हुए उपवास रखा और मंदिरों में धूप अर्पण कर धर्मलाभ लिया। पढ़िए मनोज जैन नायक की खास रिपोर्ट…
मुरैना। पर्युषण पर्व के छठवें दिन बड़े जैन मंदिर में जैन संत मुनि श्री विबोधसागरजी महाराज ने उत्तम संयम धर्म पर अपने प्रवचन में कहा कि संयम साधना के बिना मानव जीवन निरर्थक है। उन्होंने संयम को नदी के तटों की तरह बताया, जो जीवन को संतुलित रखते हैं। इन्द्रियों को वश में करना ही वास्तविक संयम है। संत ने समझाया कि इन्द्रिय वश में न होने के कारण व्यक्ति नशे और व्यसनों में पड़कर अपने जीवन को नष्ट कर देता है। संयम साधना जीवन का ब्रेक है, जो हमें सही दिशा देता है।
जिनेन्द्र प्रभु से अष्टकर्मों के नाश की प्रार्थना
आज सुगंध दशमी पर महिलाओं ने अपने सुहाग की मंगलकामना करते हुए उपवास रखा। नसीया जी मंदिर में नीलम अनिल जैन, माया पंकज जैन, रश्मि दिलीप जैन और रजनी बॉबी कुथियाना ने व्रत का निष्ठापन किया। धूप दशमी के अवसर पर नगर के सभी जिनालयों में भक्तों ने धूप अर्पित कर वातावरण को सुगंधित किया और जिनेन्द्र प्रभु से अष्टकर्मों के नाश की प्रार्थना की। मुरैना नगर में चातुर्मासरत मुनि श्री विलोकसागरजी एवं मुनि श्री विबोधसागरजी महाराज के सान्निध्य में विशेष पूजा-अर्चना हो रही है। पर्युषण पर्व 28 अगस्त से प्रारंभ हुए थे और इनका समापन 6 सितम्बर को अनंत चौदस पर होगा।













Add Comment