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स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक का पंचमेरू व्रत : निर्जला उपवास का पारणा 2 सितंबर को 


स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक महास्वामीजी नांदणी का पंचमेरू व्रत का सोमवार को 5 वां निर्जला उपवास है। कल मंगलवार को पारणा नांदणी में है। पंचमेरु व्रत, जिसे पुष्पांजलि व्रत या पंचमेरु पूजा भी कहते हैं। नांदणी से पढ़िए, यह खबर…


नांदणी। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील कोल्हापुर ने बताया कि स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक महास्वामीजी नांदणी का पंचमेरू व्रत का सोमवार को 5 वां निर्जला उपवास है। कल मंगलवार को पारणा नांदणी में है। पंचमेरु व्रत, जिसे पुष्पांजलि व्रत या पंचमेरु पूजा भी कहते हैं। जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण व्रत है, जिसमें पंचमेरु नामक जैन तीर्थों की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। इस व्रत को पांच वर्ष तक करने का विधान है और अंत में उद्यापन किया जाता है। इसमें जिनेन्द्र प्रभु की प्रतिमाओं को पुष्पों से पूजकर, ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए विभिन्न नियमों का पालन किया जाता है। नांदणी स्थित स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी जी मठ का इतिहास 1300 वर्ष पुराना है। नांदणी मठ के आधिपत्य में दक्षिण महाराष्ट्र और उत्तर कर्नाटक के 743 गांव समाविष्ट है।

इन सभी गांव में जैन धर्म के सभी धार्मिक महोत्सव, विधि विधान, पंचकल्याणक, धर्म का प्रसार एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामीजी के आदेश से और आशीर्वाद से होते है। स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक महास्वामीजी नांदणी उम्र में सबसे युवा भट्टारक जी हैं।

आप गांव-गांव भ्रमण करते हुए जिनधर्म कि सतत धर्म प्रभावना कर रहे हैं। धन्य हैं आपकी त्याग- तपस्या। आप स्वभाव के बडे विनम्र एवं मितभाषी हैं। आपके प्रवचन प्रभावशाली होते हैं। मैं अपने आपको भाग्यशाली समझता हूं कि मुझे जिनसेन महास्वामी जी के रूप में मुझे सच्चे गुरु एवं सच्चे मित्र मिले हैं। मेरी यही भावना है कि जीवन के अंतिम सांस तक गुरु-शिष्य का यह नाता बना रहे।

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