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आर्जव धर्म का मतलब आत्मा का सरल हो जाना है: आचार्यश्री विनम्रसागर जी ने प्रवचन में मायाचारी को त्यागने का किया आह्वान 


विजयनगर के एबी रोड स्थित श्री दिगंबर जैन पंच बालयति मंदिर में आचार्यश्री विनम्र सागर जी महाराज का ससंघ पावन वर्षायोग जारी है। यहां पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के अंतर्गत दशलक्षण महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ चल रहे हैं। मंदिर में इन 10 दिनों में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। मंदिर में प्रतिदिन सुबह 5.45 बजे से नित्याभिषेक और दशलक्षण विधान हो रहे हैं। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…


इंदौर। विजयनगर के एबी रोड स्थित श्री दिगंबर जैन पंच बालयति मंदिर में आचार्यश्री विनम्र सागर जी महाराज का ससंघ पावन वर्षायोग जारी है। यहां पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के अंतर्गत दशलक्षण महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ चल रहे हैं। मंदिर में इन 10 दिनों में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। मंदिर में प्रतिदिन सुबह 5.45 बजे से नित्याभिषेक और दशलक्षण विधान हो रहे हैं। सुबह 8.45 बजे से आचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज के प्रवचन हो रहे हैं। सुबह 10 बजे ससंघ की आहारचर्या और दोपहर 2.30बजे तत्वार्थ सूत्र वाचन और प्रवचन भी हो रहे हैं। शाम को 5.30 बजे से प्रतिक्रमण सामायिक किए जा रहे हैं तो रात 8.45 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम में समाजबंधु भाग लेकर पुण्यार्जन कर रहे हैं। शनिवार को सुबह प्रवचन में आचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज ने उत्तम आर्जव धर्म की महत्ता बताई। उन्होंने कहा कि उत्तम आर्जव धर्म वह है, जिससे आत्मा को सरल बना लिया जाए। आचार्यश्री ने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं से कहा कि आत्मा को सरल बनाने के लिए मायाचारी को त्यागना होगा। आचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में दो बूंद पानी की कविता के माध्यम से शुरूआत करते हुए देशना देते हुए कहा कि मनुष्य जैसे होते हैं, वैसे दिखना नहीं चाहते। जैसे दिखना चाहते हैं वैसे होते नहीं हैं। उन्होंने एक फोटोग्राफर का उदाहरण भी दिया। उन्होंने आर्जव धर्म का विस्तार से वर्णन करते हुए कई उदाहरण भी दिए। आचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज के प्रवचन से पूर्व मुनिश्री विनुतसागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आप सरल बनना चाहते हैं तो आपको स्वयं को बदलना होगा। आपको लक्ष्य साधना चाहते हैं, लेकिन आपने धनुष टेढ़ा पकड़ लिया है। हमें लक्ष्य को पाना है तो हमारा ध्यान केंद्रित करना होगा। उन्होंने कहा कि आप भगवान में मन लगाना चाहते हो, लेकिन मायाचारी आपको लक्ष्य तक पहुंचना नहीं देना चाहती। पहले मन को नियंत्रित करना होगा।

धूप दशमी पर होगी ऐतिहासिक झांकी आकर्षण का केंद्र 

श्री दिगंबर जैन पंच बालयति मंदिर में चल रहे कार्यक्रम के बारे में सुरेश भैया मलैया ने बताया कि यहां नित्य कार्यक्रम के तहत अभिषेक, शांतिधारा हो रही हैं। दशलक्षण विधान में सभी समाजजन यहां उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि दशलक्षण पर्व के तहत धूप दशमी पर विशेष आयोजन होगा। जो नगर में इतिहास रचेगा। यहां 2 सितंबर को जीवंत झांकी का निर्माण किया जाएगा। जिसका विषय है क्या जैनों की अहिंसा कायरता है? इसका उद्घाटन अपरान्ह साढ़े तीन बजे किया जाएगा। यह पूरे शहर में अनूठी झांकी होगी।

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