श्री शांतिसिंधु प्रभावना पावन वर्षायोग के तत्वावधान में आचार्य श्री वर्धमानसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सुप्रभ सागरजी महाराज और आचार्य श्री सुमति सागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री वैराग्य सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में दशलक्षण (पर्युषण) महापर्व की आराधना देवपुरा स्थित बघेरवाल छात्रावास के शांतिसिंधु सभा मंडपम में गुरुवार को आरंभ हुई। बूंदी से पढ़िएरविन्द्र काला की , यह खबर…
बूंदी। श्री शांतिसिंधु प्रभावना पावन वर्षायोग के तत्वावधान में आचार्य श्री वर्धमानसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सुप्रभ सागरजी महाराज और आचार्य श्री सुमति सागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री वैराग्य सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में दशलक्षण (पर्युषण) महापर्व की आराधना देवपुरा स्थित बघेरवाल छात्रावास के शांतिसिंधु सभा मंडपम में गुरुवार को आरंभ हुई। चातुर्मास व्यवस्था समिति के मंत्री दिनेश बोरखंडिया ने बताया कि दशलक्षण पर्व के प्रथम दिन उत्तम क्षमा धर्म पर प्रवचन हुए। मुनि श्री सुप्रभ सागर महाराज ने कहा कि इन दस दिनों में धर्म आराधना और चिंतन नहीं कर पाए तो पूरा वर्ष व्यर्थ हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि पर्युषण पर्व के दिनों में मन और मतभेद को मिलाने की आवश्यकता है। व्यक्ति ने मन में जो बैर भाव, क्रोध, कषाय की गांठ बांध रखी है वह गांठ केवल धर्मरूपी क्षमा धर्म से ही खुल सकती है। जीवन में मन के क्रोध, कषाय, बैर भाव को समाप्त करके ही मनुष्य सच्चे सुख व शांति को प्राप्त कर सकता है।
किसी भी समस्या का हल क्षमा भाव से ही संभव
मुनिश्री वैराग्य सागर महाराज ने कहा कि क्रोधी व्यक्ति का धर्म, धन, बुुद्धि नष्ट हो जाती है। व्यक्ति को मन में क्रोध का भाव हो तो उसके निर्णय करने की शक्ति भी समाप्त हो जाती है। मुनिश्री ने कहा कि क्रोध में व्यक्ति स्वयं के साथ-साथ दूसरे को भी जलाता है।
किसी भी समस्या का हल क्षमा भाव से ही होता है। चातुर्मास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष पदम बरमुंडा और संयोजक कमल कोठिया ने बताया कि दशलक्षण मंडल एवं श्रावक संस्कार शिविर के मुख्य मंगल कलश की स्थापना कैलाशचंद, ओमप्रकाश, नरोत्तम आयुष, आरुष ठग परिवार ने की। इस विधान मंडल के चारों ओर कलश स्थापना नरेंद्र कुमार, सुरेंद्रकुमार हरसौरा, केसरीलाल धानोत्या, रितेशकुमार सबदरा, पवनकुमार राहुल कुमार पेठावालों ने किया।
इन समाजजनों ने भी लिया धर्मलाभ
चातुर्मास व्यवस्था समिति के उपाध्यक्ष गजेंद्र हरसोरा, उप संयोजक सुरेश कोटिया, भानु खटोड कोषाध्यक्ष जम्बूकुमार धानोत्या ने बताया कि दस दिनों तक चलने वाला अखंड दीप प्रज्वलन शांतिसिंधु प्रभावना वर्षा योग ने किया। जिनवाणी स्थापना देवपुरा मंदिर प्रबंध समिति ने की। मंडल विधान में सौधर्म इंद्र और इंद्राणी बनकर पूजन करने का सौभाग्य चक्रवर्ती अशोककुमार धानोत्या व अक्षया जैन को प्राप्त हुआ। कुबेर इंद्र बनने का सौभाग्य नरेंद्र कुमार महेंद्र कुमार कोठिया परिवार को प्राप्त हुआ। मीडिया प्रभारी नरोत्तम जैन ने बताया कि जबलपुर से आई संगीतकार प्राची जैन ने संगीतमय तरीके से पूजन करवाई। सभी धार्मिक क्रियाएं बा.ब्र. मनीष भैया एवं देवेन्द्र कुमार जैन ने करवाई।













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