धरियावद में 15 अगस्त के अवसर पर क्षुल्लक महोदय सागर जी महाराज ने झंडारोहण के बाद स्वतंत्रता, राष्ट्रप्रेम और जैन समाज के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने देश की गौरव गाथा और धार्मिक स्वतंत्रता के महत्व को समझाया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
धरियावद। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर धरियावद के चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर परिसर में भव्य झंडारोहण का आयोजन किया गया। यह अवसर हर बच्चे, युवा और बुजुर्ग के लिए देशभक्ति और उमंग का प्रतीक रहा। आयोजन में मंदिर परिसर पुलक मंच परिवार शाखा धरियावद की ओर से स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किया गया।
इस मौके पर दिगंबर जैन क्षुल्लक महोदय सागर जी महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन हमें हमारे स्वतंत्रता सेनानियों की शहादत की याद दिलाता है, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर हमें आजादी का उपहार दिया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता केवल राजनीतिक नहीं है, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता भी समान रूप से महत्वपूर्ण है।
क्षुल्लक महोदय सागर जी ने आगे कहा कि भारत देश की गौरव गाथा आदि ब्रह्मा, आदिनाथ, राम, कृष्ण और महावीर के आदर्शों से भरी हुई है। यह वह पावन देश है जो हमेशा शांति और सुकून देने वाला है, और जिसकी संस्कृति विश्व में अनूठी है। उन्होंने कहा कि देश की सभी तीर्थस्थल और पवित्र स्थान इस भूमि को और भी सम्मानित बनाते हैं, और यहां का हर जीव, चाहे वह पाषाण हो या मानव, सभी के लिए पूजनीय है।
स्वतंत्रता संग्राम में जैन समाज के योगदान का किया स्मरण
दिगंबर जैन समाज के अशोक कुमार जेतावत ने स्वतंत्रता संग्राम में जैन समाज के योगदान का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि कई जैन समाज के वीरों ने अंग्रेजों की हुकूमत के खिलाफ अपने प्राणों की आहुति देकर भारत के स्वाभिमान की रक्षा की। इनमें लाला लाजपत राय, लाला हुकुमचंद जैन, अमरचंद बांठिया, मोतीचंद शाह, अण्णा पत्रावले, वीर साताप्पा टोपण्णवार, फकीरचंद, रायचंद नागड़ा, सिंघई प्रेमचंद, आगरा की अंगूरी देवी, लीला बहन और रमा बहन शामिल हैं।













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