झुमरीतिलैया के श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में 16 दिवसीय शांति विधान, भगवान श्रेयांसनाथ के मोक्ष कल्याणक एवं रक्षा बंधन पर्व का भव्य आयोजन हुआ। हवन, महामस्तकाभिषेक, निर्वाण लाडू चढ़ाने और रक्षा बंधन के ऐतिहासिक प्रसंग को जीवंत करते हुए श्रद्धालुओं ने धर्म रक्षा का संकल्प लिया। पढ़िए राज कुमार जैन अजमेरा एवं नवीन जैन की खास रिपोर्ट…
झुमरीतिलैया। श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में आयोजित 16 दिवसीय शांति विधान का समापन हवन एवं 121 अर्घ अर्पण के साथ सम्पन्न हुआ। इस विधान का ध्वजारोहण जय कुमार–त्रिशला जैन गंगवाल ने किया, जबकि विधानाचार्य अभिषेक जैन शास्त्री एवं संयोजक सुरेन्द्र जैन काला ने 16 दिवसीय शुक्ल पक्ष में शांतिनाथ भगवान की आराधना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह परंपरा रामायण काल से चली आ रही है, जब मथुरा नगर में महामारी के समय मुनिराज के उपदेश से इस अनुष्ठान से महामारी का शमन हुआ था। समापन दिवस पर प्रातः 5:30 बजे शांतिनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक एवं विश्वशांति धारा की गई। इसके साथ ही श्रेयांसनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक निर्वाण लाडू चढ़ाकर मनाया गया। रक्षा बंधन पर्व के अवसर पर हस्तिनापुर के ऐतिहासिक प्रसंग का स्मरण करते हुए 700 मुनियों की रक्षा का संकल्प लिया गया।
इनको मिला सौभाग्य
मंदिर में ‘सोना राखी’ बांधने का सौभाग्य सुरेश–प्रेम जैन झांझरी के परिवार को मिला, जबकि निर्वाण लाडू चढ़ाने का अवसर प्रदीप–मीरा जैन छाबड़ा और प्रदीप–प्रेम जैन पांड्या परिवार को प्राप्त हुआ। आयोजन में मुख्य संयोजक सुरेन्द्र जैन काला, ललित–नीलम जैन सेठी, जय कुमार जैन गंगवाल, सुबोध–आशा जैन गंगवाल सहित जैन समाज के सभी सदस्यों ने सहयोग किया। कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार जैन अजमेरा एवं नवीन जैन ने जानकारी दी।













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