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राष्ट्र, धर्म, संस्कृति की रक्षा का संकल्प ही रक्षाबंधन है-मुनिश्री विलोकसागर : 9 अगस्त को रक्षा बंधन विधान एवं निर्वाण लाड़ू महोत्सव


जैन समुदाय में भी रक्षा बंधन मनाया जाता है। अन्य धर्मों में जहां रक्षाबंधन को भाई बहन के स्नेह और रक्षा के रूप में देखा जाता है वहीं जैन धर्म में इसका व्यापक रूप देखने को मिलता है। जैन धर्म में रक्षाबंधन का पर्व विष्णुकुमार मुनि और 700 मुनियों की रक्षा की याद में मनाया जाता है। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर...


मुरैना। अन्य समुदायों की तरह जैन समुदाय में भी रक्षा बंधन मनाया जाता है। अन्य धर्मों में जहां रक्षाबंधन को भाई बहन के स्नेह और रक्षा के रूप में देखा जाता है वहीं जैन धर्म में इसका व्यापक रूप देखने को मिलता है। जैन धर्म में रक्षाबंधन का पर्व विष्णुकुमार मुनि और 700 मुनियों की रक्षा की याद में मनाया जाता है। यह उद्गार बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यह पर्व भाई-बहन के प्रेम के साथ-साथ देश, धर्म, और समाज की रक्षा का संकल्प लेने का भी दिन है। वस्तुतः रक्षाबंधन राष्ट्र, धर्म, जैन संस्कृति, जैन मंदिरों, जैन संतों और जैन समाज की रक्षा के लिए संकल्पित होने का पर्व है, ताकि यह आध्यात्मिक संस्कृति सदैव प्रवाहित होती रहे। मुनि श्री ने बताया कि कर्मों से ना बंधकर आत्म साधना की रक्षा, आत्म स्वरुप की रक्षा, धर्म की रक्षा, करुणा भाव से समस्त जीवों की रक्षा करना ही ‘रक्षा बंधन’ है। जैन धर्म में रक्षाबंधन का पर्व मुनि विष्णु कुमार द्वारा 700 मुनियों की रक्षा से जुड़ा है। इस दिन, जैन अनुयायी न केवल भाई-बहन के बीच, बल्कि पूरे समुदाय और धर्म की रक्षा के लिए भी संकल्प लेते हैं। यह पर्व जैन धर्म में आस्था और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन जैन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

रक्षाबंधन पर 9 अगस्त को होंगे विभिन्न कार्यक्रम 

नगर के बड़े जैन मंदिर में आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित आचार्यश्री आर्जवसागरजी महाराज के शिष्य मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागर जी महाराज का 2025 का आध्यात्मिक पावन वर्षायोग धर्म प्रभावना के साथ चल रहा है। 9 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन युगल मुनिराजों के पावन सान्निध्य में प्रातःकालीन बेला में 6 बजे श्री जिनेंद्र प्रभु के अभिषेक, शांतिधारा एवं अष्टद्रव्य से पूजन किया जाएगा। इसके बाद 7 बजे रक्षा बंधन विधान होगा। जिसमें विष्णुकुमार एवं अन्य 700 मुनिराजों की पूजा-अर्चना करते हुए 700 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे। प्रातः 8.30 बजे युगल मुनिराजों के प्रवचन होंगे। प्रवचनों के बाद भगवान श्रेयांसनाथ स्वामी का निर्वाण लाड़ू अर्पित होगा। इसके बाद मुनिराजों द्वारा रक्षा सूत्रों का वितरण किया जाएगा।

सागर से आएंगे प्रतिष्ठाचार्य पवन शास्त्री दीवान

रक्षाबंधन पर विधान एवं भगवान श्रेयांसनाथ स्वामी के नर्वाण लाड़ू महोत्सव के लिए सागर से प्रतिष्ठाचार्य पंडित पवनकुमार शास्त्री दीवान को आमंत्रित किया गया है। विधानाचार्य दीवान विधान सहित सभी कार्यक्रमों को मंत्रोच्चारण के साथ संपन्न कराएंगे। इस अवसर पर संघस्थ ब्रह्मचारी संजय भैयाजी बम्होरी, ब्रह्मचारी राहुल भैयाजी गंज बासौदा, चक्रेश शास्त्री, संजय शास्त्री, नवनीत शास्त्री एवं अन्य विद्वान, त्यागीवृति विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में भजन गायक एवं संगीतकार मनीष जैन एंड पार्टी द्वारा विशेष प्रस्तुति दी जाएगी।

मनाया जाएगा भगवान श्रेयांसनाथ का मोक्ष कल्याण’

रक्षाबंधन वाले दिन जैन धर्म के तीर्थंकर भगवान श्रेयांसनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर जैन मंदिरों में सभी श्रावक एवं श्राविकाएं भगवान श्रेयांसनाथ का विशेष पूजन एवं भक्ति करते हुए उनकी उपासना करेंगे। सभी लोग एक साथ भक्ति एवं श्रद्धा के साथ निर्वाण कांड निर्वाण कांड का वाचन करते हुए मोक्ष लक्ष्मी की कामना के साथ निर्वाण लाड़ू समर्पित करेंगे। सभी भक्तगण महामंत्र नमोकार का जाप एवं जिनेंद्र प्रभु की स्तुति करते हुए भक्ति भाव के साथ पूजन अर्चन करेंगे।

’क्यों मनाया जाता है रक्षा बंधन ?

पौराणिक काल में अकंपनाचार्य के नेतृत्व में 700 जैन मुनियों का एक संघ हस्तिनापुर पहुंचा। राजा बलि ने उन पर उपसर्ग किया, जिससे मुनियों को कष्ट होने लगा। मुनि विष्णुकुमार ने वामन का रूप धारण कर बलि से तीन पग भूमि मांगी और तीन पग में ही सारा संसार नापकर मुनियों की रक्षा की। इस घटना को जैन धर्म में रक्षा बंधन के रूप में मनाया जाता है। जैन धर्म में रक्षा बंधन न केवल भाई-बहन के बीच प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक है, बल्कि यह राष्ट्र, धर्म, और समाज की रक्षा का भी संकल्प लेने का दिन है। इस दिन, जैन धर्मावलंबी मंदिर जाते हैं, मुनि विष्णुकुमार और 700 मुनियों की पूजा करते हैं और एक-दूसरे को राखी बांधकर एक-दूसरे की रक्षा करने का संकल्प लेते हैं।

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