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परिणाम निर्मल तो जीवन भी निर्मल: आचार्य श्री विनिश्चयसागर के प्रवचनों से अपार धर्म प्रभावना 


आचार्यश्री विनिश्चय सागर महाराज का ससंघ वर्षायोग विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों के साथ चल रहा है। अपार धर्म प्रभावना हो रही है। प्रवचनों में नगर के गणमान्य और गुरु भक्त यहां लाभार्जन कर रहे हैं। रामगंजमंडी से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर…


रामगंजमंडी। नगर में आचार्यश्री विनिश्चय सागर महाराज का ससंघ वर्षायोग विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों के साथ चल रहा है। अपार धर्म प्रभावना हो रही है। आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज ने मंगल प्रवचन में कहा कि परिणाम निर्मल होंगे तो जीवन भी निर्मल होगा और जीवन से बहुत सारी चीज डिलीट होंगी। आपका तनाव एवं डिप्रेशन अलग हो जाएगा। अपने आप पर विश्वास करें। दूसरों पर विश्वास करना हमारी आदत है। आत्मविश्वास सबसे बड़ा विश्वास है, लोग सब पर विश्वास करते हैंए लेकिन स्वयं पर नहीं। आचार्य श्री ने मंत्र शक्ति के बारे में कहा कि मंत्र की शक्ति निर्मल परिणामों में प्रकट होती है। दूषित परिणामों में मंत्र की शक्ति प्रकट नहीं होती।

यदि मंत्र को शक्ति बनाना है तो परिणामों को निर्मल करना होगा। धर्म ध्यान में पहुंचना होगा तब जाकर मंत्र की उपलब्धि होगी। उन्होंने मंत्र के विषय में कहा कि मंत्र को जपते समय निर्मल परिणाम बना लोगे तो उपलब्धि होगी, यदि निर्मल परिणाम नहीं बनाओगे तो वह उपलब्धि नहीं होगी जो तुम चाहते हो। यदि निर्मल परिणाम नहीं बना तो मंत्र वह नहीं दे सकता, जिसकी आपको जरूरत है। उन्होंने णमोकार मंत्र के विषय में कहा कि णमोकार मंत्र को पढ़ना आसान नहीं है।

उसे अंतस चेतना से जाप करना कठिन काम है, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि हम नहीं कर सकते। णमोकार मंत्र को यदि शुद्ध परिणाम से जपा जाए तो व्यंतर आदि कष्ट पीड़ा इसके अक्षर मंत्र से दूर होती है। मंत्र में बहुत ऊर्जा होती है। णमोकार मंत्र की पात्रता भी होनी चाहिएए बिना पात्रता के णमोकार मंत्र का लाभ नहीं है।

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