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सेठ वालचंद जैन को भारत रत्न मिले: स्वदेशी के स्वप्न दृष्टा थे ऐसे कर्मयोगी 


सेठ वालचंद हीराचंद जैन को भारत रत्न मिलना चाहिए। जिस सम्मान के वे हकदार हैं। सेठ वालचंद हीराचंद जैन ने अपनी मेहनत से देश में ही तकनीकी शिक्षा से लेकर औद्योगिक प्रगति का सूत्रपात किया है। बैंगलोर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर…


बैंगलोर। सेठ वालचंद हीराचंद जैन को भारत रत्न मिलना चाहिए। जिस सम्मान के वे हकदार हैं। सेठ वालचंद हीराचंद जैन ने अपनी मेहनत से देश में ही तकनीकी शिक्षा से लेकर औद्योगिक प्रगति का सूत्रपात किया है। वे न केवल एक व्यवसायी थे, बल्कि वे स्वदेशी आत्मनिर्भरता के पहले स्वप्नदृष्टा थे। उन्होंने औद्योगिक भारत का बीजारोपण किया। वह भी उस समय जब देश गुलाम था। क्यों सेठ वालचंद हीराचंद ‘भारत रत्न’ के पात्र हैं? इसका आंकलन ऐसे किया जा सकता है।

भारतीय एयरोस्पेस के जन्मदाता 

एचएएल की नींव उन्होंने डाली और उसी पर खड़े होकर आज भारत तेजस, राफेल सपोर्ट, और अंतरिक्ष यान बना रहा है।

पहली स्वदेशी शिपयार्ड (सिंदिया शिपयार्ड )

जब भारत में कोई समुद्री जहाज नहीं बनता था, उन्होंने कहा-हम बना सकते हैं।

ऑटोमोबाइल में क्रांति (प्रीमियर ऑटो मोबाइल)

भारत में कार निर्माण की शुरुआत की, जहां विदेशी कंपनियां राज करती थीं।

शिक्षा और समाज सेवा 

उन्होंने वालचंद कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग जैसे संस्थान स्थापित किए, जो आज भी उत्कृष्ट इंजीनियरिंग शिक्षा दे रहे हैं। स्वदेशी के सच्चे पुजारी। गांधीजी के स्वदेशी आंदोलन को उन्होंने औद्योगिक स्तर पर चरितार्थ किया।

क्यों अब तक नहीं मिला भारत रत्न? 

नेहरू-युग की समाजवादी सोच में निजी उद्योगपतियों को ज्यादा मान्यता नहीं दी गई। टाटा, बिरला जैसे नाम समय के साथ जुड़ गए, पर वालचंद जी को भुला दिया गया। इतिहास लिखने वालों ने उनके योगदान को उतनी जगह नहीं दी। जितनी मिलनी चाहिए थी। भारत सरकार को क्या करना चाहिए?

प्रस्ताव विवरण

भारत रत्न सेठ वालचंद जी को मरणोपरांत भारत रत्न दिया जाए। एचएएल में स्मारक एचएएल परिसर में उनकी प्रतिमा और इतिहास दीर्घा बने। राष्ट्रीय स्मृति दिवस श्वालचंद दिवसश् के रूप में हर साल उनकी जयंती (23 नवम्बर) मनाई जाए। पाठ्यक्रम में शामिल स्कूली और तकनीकी शिक्षा में उनके योगदान को पढ़ाया जाए। सेठ वालचंद हीराचंद केवल उद्योगपति नहीं थे। वे एक दृष्टा थे, जिनकी आंखों में उस भारत का सपना था, जो आज बन रहा है। उनका भारत रत्न से सम्मान केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि भारतीय आत्मनिर्भरता के पहले बीज को नमन होगा।

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