भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में मुनिराजों का चातुर्मास जारी है। यहां पर मुनियों के प्रवचनों से स्थानीय दिगंबर जैन समाज के लोग भक्ति भाव से जुड़ रहे हैं। प्रवचनों में दी जा रही धर्म देशना के कारण लोगों को जीवन कल्याण के सूत्र मिल रहे हैं। मंगलवार को यहां हुए प्रवचन में मुनिश्री सारस्वत सागर जी महाराज के प्रवचन हुए। इसमें उन्होंने मुखिया के महत्व और उसके कर्तव्यों से अवगत करवाया। नांद्रे से पढ़िए, यह खबर…
नांद्रे। भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में मुनिराजों का चातुर्मास जारी है। यहां पर मुनियों के प्रवचनों से स्थानीय दिगंबर जैन समाज के लोग भक्ति भाव से जुड़ रहे हैं। प्रवचनों में दी जा रही धर्म देशना के कारण लोगों को जीवन कल्याण के सूत्र मिल रहे हैं। मंगलवार को यहां हुए प्रवचन में मुनिश्री सारस्वत सागर जी महाराज के प्रवचन हुए। इसमें उन्होंने मुखिया के महत्व और उसके कर्तव्यों से अवगत करवाया। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील कोल्हापुर ने बताया कि पट्टाचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनिश्री सारस्वत सागरजी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागरजी महाराज और क्षुल्लकश्री श्रुतसागर जी का चातुर्मास भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में चल रहा है। मुनि श्री सारस्वत सागरजी ने प्रवचन में कहा कि एक देश या प्रदेश चलाने के लिए जो भी आवश्यक होता है, वही सब आवश्यक घर चलाने के लिए भी होता है।
जैसे शासन में मंत्रालय होते हैं, जो प्रजा की आवश्यकताओं को पूर्ण करने का प्रयास करते हैं और प्रत्येक मंत्रालय का अपना-अपना मुखिया होता है, जिससे कार्य में विकल्प न आए परंतु, सब विभाग होने पर भी एक मुख्य विभाग अध्यक्ष अवश्य होता है, जो राजा का कार्य करता है। अंतिम निर्णय उसी के हाथ में रहता है। वह स्वतंत्र होते हुए भी परतंत्र रहता है क्योंकि उसको मुखिया बनाने का काम सबने मिलकर किया है और वह अपनी बुद्धि मात्र से चलेगा तो उसकी सत्ता चल नहीं पाएगी।
ठीक उसी प्रकार से यदि हम अपने घर में व्यवस्था करके चलते हैं तो हमारा घर भी समृद्धि को, यश को प्राप्त हो सकता है। सब लोग सब काम करेंगे तो नियम से आपस में विकल्प खडे़ होंगे। योजना बनाने की स्वतंत्रता आपके पास है परंतु, योजना को कार्य रुप में परिणत करने के लिए सबको सलाह और सबके साथ की जरुरत है। घर में मुखिया भी अवश्य होना चाहिए, जो सारे निर्णय विवेक पूर्वक, विचार पूर्वक और सबकी समझ को समझकर निर्णय लें। घर का मुखिया वृद्ध हो, यह कोई आवश्यक नहीं है। मुखिया जो योग्य हो। वह चाहे वृद्ध हो या चाहे बाल या चाहे कोई भी पुरुष-स्त्री हो स्वीकार है।













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