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मुनि श्री सिद्ध सागर महाराज जी ने किया केशलोच : आध्यात्मिक बल तथा शरीर के उपेक्षा भाव की परीक्षा होती है


मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज ने 16 जुलाई को प्रात: केशलोंच की प्रक्रिया पूर्ण की। इस दौरान भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर नांद्रे में समाज के वरिष्ठजन एवं श्रद्धालुगण बड़ी संख्या में मौजूद थे और केशलोच की पूर्ण प्रक्रिया के दौरान मंत्रों का जाप कर रहे थे। नांद्रे से पढ़िए अभिषेक अशोक पाटिल की यह खबर…


नांद्रे। पट्टाचार्य विशुद्धसागर जी के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्रुतसागर महाराज जी भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। मुनि श्री सिद्ध सागर जी के भक्त नवीनकुमार पाटील ने कहा कि बुधवार को मुनि श्री सिद्ध सागर महाराज के केशलोच पर आइए जानते हैं उनके जीवन की कुछ खास बात ।आज से 23 वर्ष पूर्व मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज का जन्म मध्य प्रदेश के भिंड जिला के रूर ग्राम में 7 सितम्बर 2002 में हुआ। इस नगर से अनेक मुनि, आर्यिका और व्रती बन चुके हैं। मुनि सिद्ध सागर महाराज कहते है कि मेरा सौभाग्य रहा कि जिस ग्राम रूर में जिस परिवार में आचार्य श्री विशुद्धसागर महाराज जी का जन्म हुआ। उसी घर में मेरा भी जन्म हुआ। साधु के 28 मूलगुणों में से एक गुण केशलौच भी है।

जघन्य 4 महीने, मध्यम तीन महीने और उत्कृष्ट दो महीने के पश्चात् वह अपने बालों को अपने हाथ से उखाड़कर फेंक देते हैं। इस पर से उसके आध्यात्मिक बल तथा शरीर पर से उपेक्षा भाव की परीक्षा होती है। मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज ने 16 जुलाई को प्रात: केशलोंच की प्रक्रिया पूर्ण की। इस दौरान भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर नांद्रे में समाज के वरिष्ठजन एवं श्रद्धालुगण बड़ी संख्या में मौजूद थे और केशलोच की पूर्ण प्रक्रिया के दौरान मंत्रों का जाप कर रहे थे ।

प्रकिया को बारीकी से देखने के लिए विनय पाचोरे, सुमित पाटील, शुभम पाचोरे, प्रितम पाटील, प्रतिक चौगुले, सुधीर भोरे, दादासाहेब पाटील, प्रमोद उपाध्ये और जैन समाज के लोग जुटे रहे। विनय पाचोरे,नांद्रे ने कहा कि दिगम्बर जैन साधु की चर्या अद्भुत होती है। धन्य है ऐसे दिगंबर मुनि सिद्धसागर जी महाराज इनके चरणों में अनंत बार नमन।

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