आचार्यश्री विमर्शसागर जी 10 जुलाई को संपूर्ण आचार्य संघ निर्जल उपवास के साथ वर्ष 2025 के चातुर्मास के लिए मंगल कलश स्थापना करेंगे। सुबह 10 बजे से ही कार्यक्रम प्रारंभ होगा। गुरु पूर्णिमा के महापर्व पर आचार्य संघ एवं देशभर से आगंतुक हजारों की संख्या में भक्त समूह परिपूर्ण हर्ष-उत्साह के साथ महापूजा करेंगे। सराहनपुर से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर…
सहारनपुर। संत समागम सहज सामान्य पुण्य से प्राप्त नहीं होता। संतों का समागम जन्मों-जन्मों के असीम पुण्यों से प्राप्त होता है। एक ही नहीं सैकड़ों-हजारों-लाखों प्राणियों का एक साथ असीम पुण्यों का उदय होता है। समस्त नगरवासियों का पुण्य एकत्रित होकर उदय में आता है तब कहीं संत समागम प्राप्त हो पाता है। सहारनपुर नगर का महान पुण्य जाग्रत हुआ है, जो एक, दो नहीं पूरे 30 पिच्छी धारी दिगंबर मुनिराज, आर्यिका, श्रावक, श्राविका रूप चतुर्विध संघ के साथ पधार रहे हैं। ‘जीवन है पानी की बूंदे महाकाव्य‘ के मूल रचयिता आचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी का वर्षाकाल प्रवास यहां होने जा रहा है। आचार्यश्री का चार माह की दिगम्बर चर्या को पालन करने तथा सभी नगरवासियों को सुखी जीवन के दिव्य सूत्रों को प्रदान करने के लिए मंगलमय चातुर्मास प्राप्त हुआ है। आचार्य श्री विमर्श सागर जी मात्र जैन समाज ही नहीं अपितु समस्त संप्रदायों के साथ संपूर्ण देशवासियों के लिए एक प्रेरक और आदर्श संत के रूप में कठिन तप-साधना में संलग्न रहा करते हैं।
30 जून को हुआ था मंगल प्रवेश
सहारनपुर जैन समाज आन्चार्य श्री के चरणों इस वर्ष के मंगलमय चातुर्मास हेतु निवेदन लगातार कर रही थी। 31 मई को सहारनपुर का परम सौभाग्य जागा, जो अतिशय क्षेत्र बड़ागांव में विभिन्न नगरों से आए भक्तों के मध्य सहारनपुर जैन समाज को पूज्यश्री का 2025 का चातुर्मास कराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। 2 जून को बड़ागांव से चातुर्मास सहारनपुर के लिए गुरुदेव की पदयात्रा प्रारंभ हुई। रास्ते में विभिन्न नगर-शहरों में जिनागम पंथ की पताका फहराते हुए 28 जून को आचार्यश्री ने नगर की सीमा सहारनपुर के आवास-विकास में प्रवेश किया एवं 29 जून को चंद्रनगर की धरा को पवित्र करते हुए 30 जून को जैन बाग में समस्त जैन सहारनपुर ने आचार्य संघ का ऐतिहासिक मंगल प्रवेश कराया।
3 जुलाई से 10 जुलाई तक हो रही सिद्ध भगवंतों की आराधना
जैन धर्म में जिनेंद्र भगवान की भक्ति का भी अद्भुत माहात्म्य बतलाया है। सिद्धों की आराधना से हमारे जीवन से सभी प्रकार के दुःख कष्ट-बाधाएं दूर भागती नजर आती है। आचार्य श्री विमर्श सागर जी मुनिराज (ससंघ) के सानिध्य एवं आशीर्वाद से एवं विधानाचार्य शुभम जी शास्त्री एवं केशव एंड पार्टी की मधुर लहरियों के साथ जिन आराधना का सातिशय पुण्य अर्जन समस्त जैन समाज ने प्राप्त किया। 5 जुलाई को आचार्य श्री ने अपने गुरुवर श्री विराग सागर जी को मांगलिक भाव विनयांजलि समर्पित की। यह गुरुदेव का प्रथम समाधि महोत्सव दिवस का प्रसंग था। 10 जुलाई, गुरु पूर्णिमा के अविस्मरणीय पल सहारनपुर के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखे जाएंगे।
सहारनपुर धर्मनगरी में पूज्य आचार्य ने प्रथम बार पदार्पण किया है। आचार्य संघ के आगमन से संपूर्ण नगर में अभूतपूर्व खुशहाली का वातावरण बना हुआ है। 10 जुलाई को संपूर्ण आचार्य संघ निर्जल उपवास के साथ वर्ष 2025 के मंगलमय चातुर्मास के लिए मंगल कलश स्थापना करेंगे। प्रातः काल 10 बजे से ही कार्यक्रम प्रारंभ होगा। गुरु पूर्णिमा के महापर्व पर आचार्य भगवन् की संपूर्ण संघ एवं देशभर से आगंतुक हजारों की संख्या में भक्त समूह परिपूर्ण हर्ष-उत्साह के साथ महापूजा करेंगे। मंगल कलश स्थापना करने वाले महापात्रों का चयन किया जाएगा। आगामी चातुर्माम काल में भी जैन समाज के साथ समस्त नगर वासी आन्चार्य श्री एवं समस्त संघ की चर्चा एवं मंगलमय वाणी से लाभान्वित होते रहेंगे।













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