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आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ससंघ का टोंक में ऐतिहासिक मंगल प्रवेश: टोक नगरी एक अदभुत दृश्य की साक्षी बनी 


65 जिन बिम्बों के अतिशय से सुशोभित भगवान् आदिनाथ की अतिशयकारी नगरी को सोमवार को गर्वित होने का अहसास तब प्राप्त हुआ, आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की अक्षुण्ण परम्परा के आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महाराज ससंघ ने वर्ष 2025 के चातुर्मास के लिए अपने चतुर्विध संघ सहित जैन नसिया जी मंदिर में भव्यातिभव्य मंगल प्रवेश किया। टोंक से पढ़िए, यह खबर…


टोंक। 65 जिन बिम्बों के अतिशय से सुशोभित भगवान् आदिनाथ की अतिशयकारी नगरी को सोमवार को गर्वित होने का अहसास तब प्राप्त हुआ, आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की अक्षुण्ण परम्परा के आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महाराज ससंघ ने वर्ष 2025 के चातुर्मास के लिए अपने चतुर्विध संघ सहित जैन नसिया जी मंदिर में भव्यातिभव्य मंगल प्रवेश किया। टोक की धरती का कण कण आज इठला रहा था क्योंकि, धरती के भगवान के चरण उसकी धरती पर पड़ रहे थे। सोमवार प्रातः काल की बेला से ही ही भक्तों का विभिन्न स्थानों से भक्तांे आगमन प्रारंभ हो चुका था। धर्म नगरी टोक का बच्चा-बच्चा श्री संघ एव मेहमानों की अगवानी के लिए तैयार था। 7 जुलाई की प्रातः से ही सभी जनों के चेहरे पर उभरे खुशी के भाव स्पष्ट नजर आ रहे थे। टोकवासियों के 55 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा अब पूरी होने जा रही थी। संघ का भव्य स्वागत करने हेतु टोक प्रवेश की जगह पर भव्य तोरण द्वार बनवाया गया था। कदम कदम पर आचार्य श्री के मंगल प्रवेश और अभिनंदन के होर्डिंग्स नजर आ रहे थे। नवाबांे की नगरी के नाम से मशहूर टोक पूरी तरह से केशरिया रंग में रंगी थी। सुबह से आस पास के गांवों से श्रद्धालुओं की अपार संख्या गुरु भक्ति के लिए प्रवेश द्वार पर पहुंचने लगीं। और देखते ही देखते हजारों का अपार समूह जयकारों के उद्घोष से गूंजने लगा। चारों ओर स्त्री पुरुष अगवानी करते नजर आ रहे थे। कलेक्टर कल्पना अग्रवाल एसपी विकास सागवान जिला प्रमुख सरोज बंसल भव्य अगवानी के लिए उपस्थित थे। 7. 15 बजे आचार्य श्री ने संघ सहित टोक द्वार की सीमा में प्रवेश किया। आचार्य श्री शांति सागर जी एव आचार्य श्री वर्धमानसागर जी के जयकारों से आकाश गुंजायमान हो उठा। प्रवेश द्वार पर आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन हुए।

शोभायात्रा में उमड़े समाजजन 

शोभायात्रा में आगे-आगे घोड़े, ऊंट, तरह-तरह के बैंडबाजे, साथ में विभिन्न पोशाकों में स्थानीय समाज जन मौजूद रहे। स्थानीय महिलाएं मस्तक पर कलश धारण कर चल रही थी। भक्ति भाव से युवाओं ने बैंड वादन किया। टोक का प्रत्येक नागरिक आज आचार्य संघ के दर्शन और शोभायात्रा में शामिल होने को आतुर था। श्रद्धालुओं के हुजूम के बिच आचार्य संघ मानो किसी सिंह की भांति चल रहे थे। टोक नगरी आज उत्साह और भावों की धरा नजर आ रही थी। श्रद्धालुओं ने गुरु आगमन के साथ ही वर्षायोग के लिए एक नए उत्साह का बिगुल बजा दिया। निश्चित समय पर संघ का प्रवेश नसिया जी में हुआ। जहा समाज के पदाधिकारियों एव वर्षायोग समिति ने आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन किए। कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला प्रमुख, पूर्व सभापति लक्ष्मी देवी, युवा नेता विनायक जैन, नरेश बंसल ने चित्र अनावरण कर द्वीप प्रज्वलित कर धर्मसभा का शुभारंभ किया। मंच संचालन विकास अतार और कमल सर्राफ ने किया।

विभिन्न गांवों और शहरों से भी जुटे श्रद्धालुजन 

यहां पर विनोद सर्राफ, हेमराज नमक वाले निवाई, रचना टोरडी एवं अंजना मंडावर ने मंगलाचरण किया ।एवं आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज एवं पट्ट परम्परा के आचार्य वृंद को अर्घ्य समर्पित किया गया। आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन श्रेष्ठी श्री सौरभ कुमार जी , जंबू कुमार जी, टोनी कुमार जी आंडरा परिवार द्वारा एवं शास्त्र भेंट श्रेष्ठी श्री महावीर प्रसाद जी, धर्मेंद्र कुमार जी, जितेंद कुमार जी, अविकांश कुमार जी पासरोटिया परिवार द्वारा किया गया। चातुर्मास प्रबंध कारिणी समिति एवं समाजजन ने आचार्य श्री ससंघ को चातुर्मास के लिए श्रीफल भेंट किया। आचार्य श्री ने सभी को मंगल आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि प्रभु भक्ति और गुरु भक्ति से सभी कार्य संपादित होते है,संघ के विहार, आहार आदि में सभी समाज जनों ने अपनी सेवा प्रदान की। इस अवसर पर समिति और स्थानीय समाज ने गज्जू भैया, प्रमित जैन और तारा देवी सेठी का उनके त्याग, समर्पण, और सेवा के लिए विशेष अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर आसपास के गांवों से जन समूह आचार्य संघ की अगवानी के लिए आए। जयपुर, किशनगढ़,कोटा, निवाई लावा, डिग्गी टोडा, देवली, पिपलु, उनियारा, इचलकरंजी, धरियावद, सनावद, जोबनेर, इंदौर से भी श्रद्धालुओं का आगमन हुआ।

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