समाचार

योग से ही आत्मशुद्धि और मुक्ति का मार्ग: नीति जैन ने बताया योग का महत्व 


जैन धर्म में योग दिवस का विशेष महत्व है। जैन धर्म में योग को आत्मा की शुद्धि और मुक्ति का साधन माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जैन धर्म के अनुयायी योग और ध्यान के महत्व को समझते हैं और इसका अभ्यास करते हैं। जैन धर्म में योग का महत्व है। अंबाह से पढ़िए, सौरभ जैन की यह खबर…


अंबाह। जैन धर्म में योग दिवस का विशेष महत्व है। जैन धर्म में योग को आत्मा की शुद्धि और मुक्ति का साधन माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जैन धर्म के अनुयायी योग और ध्यान के महत्व को समझते हैं और इसका अभ्यास करते हैं। जैन धर्म में योग का महत्व है। नीति जैन ने बताया कि जैन धर्म में योग से आत्मा को शुद्ध करने और सांसारिक बंधनों से मुक्त करने का एक तरीका माना जाता है। योग के अभ्यास से जैन धर्म में मोक्ष (मुक्ति) प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त होता है। योग में ध्यान और श्वास नियंत्रण शामिल हैं, जो अहिंसा के सिद्धांत का पालन करने में मदद करते हैं, जो जैन धर्म का एक प्रमुख सिद्धांत है।

योग दिवस को सामूहिक उत्सव का अवसर 

जैन धर्म के तीर्थंकरों (शिक्षक-आध्यात्मिक गुरुओं) को अक्सर योग मुद्राओं में दर्शाया जाता है, जैसे पद्मासन और कायोत्सर्ग जो योग के महत्व को दर्शाते हैं। जैन आचार्य और मुनि भी योग का अभ्यास करते हैं, जैसे प्रेक्षा ध्यान, जो जैन धर्म में ध्यान का लोकप्रिय रूप है। योग दिवस जैन धर्म के लोगों को योग के लाभों और इसके महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने का अवसर है। यह दिन जैन धर्म के लोगों को योग का अभ्यास करने और इसे अपने दैनिक जीवन में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित करता है। जैन समुदाय योग दिवस को सामूहिक उत्सव के रूप में मनाता है, जिसमें योग सत्र, ध्यान और व्याख्यान आयोजित किए जाते हैं। संक्षेप में जैन धर्म में योग का बहुत महत्व है और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस जैनियों के लिए योग के अभ्यास और इसके लाभों को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
0
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page