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आचार्य श्री श्रुतधर नंदी जी का आगमन : डडूका में संतों के प्रथम बार महामिलन बना ऐतिहासिक पल 


जोलाना से विहार कर गुरुवार को डडूका पधारे आचार्य श्री श्रुतधर नंदी जी का यहां प्रवासरत मुनि श्री शुद्धसागरजी महाराज से महामिलन ने दिन यादगार बना दिया। गुरुवार सुबह जब दोनों मुनि अपने-अपने संयम उपकरण पिच्छिका धारण किए एक दूसरे से गले मिले तो श्रावक-श्राविकाओं को भावुक कर देने वाले पल बन गए। दोनों ने एक दूसरे की कुशल क्षेम पूछ धर्म चर्चा की। डडूका से पढ़िए, यह खबर…


डडूका। जोलाना से विहार कर गुरुवार को डडूका पधारे आचार्य श्री श्रुतधर नंदी जी का यहां प्रवासरत मुनि श्री शुद्धसागरजी महाराज से महामिलन ने दिन यादगार बना दिया। गुरुवार सुबह जब दोनों मुनि अपने-अपने संयम उपकरण पिच्छिका धारण किए एक दूसरे से गले मिले तो श्रावक-श्राविकाओं को भावुक कर देने वाले पल बन गए। दोनों ने एक दूसरे की कुशल क्षेम पूछ धर्म चर्चा की। इस अवसर पर धर्मसभा को पहले मुनि शुद्ध सागरजी ने संबोधित करते हुए कहा कि ये डडूका वालों का सौभाग्य है कि उनके वहां पार्श्वनाथ प्रांगण में संत मिलन हो रहा है। ऐसा मौका नसीबों से मिलता है। हम दोनों साधुओं का ऐसा ये मिलन तीसरी बार हो रहा है। पहली बार उदयपुर में मिले, दूसरी बार कुशलगढ़ और अब तीसरी बार डडूका नगरी में पुनः मिलना हुआ है। अपने प्रवचन में युवाचार्य श्री श्रुतधर नंदी जी ने कहा कि संत सौभाग्य से मिलते हैं और जब गंगा घर पर आई है तो इसका लाभ आपको अवश्य उठाना चाहिए।

उन्होंने प्रतिदिन देवदर्शन, रात्रि भोजन त्याग और पानी छानकर पीना जैनों की पहचान बताया। युवाओं और बुजुर्गों से उन्होंने 6 आवश्यक नियमों के पालन का आग्रह किया। कर्म सिद्धांत पर चर्चा करते हुए युवाचार्य ने कहा कि जो जन्मा है वो मरेगा ही फिर जब ये पता है कि कुछ भी साथ नहीं आना है तो फिर क्यों पूरी जिंदगी तनाव में बिताना, मस्त रहकर प्रभु की भक्ति पूजा करते हुए ही जीवन बिताना हमारा ध्येय होना चाहिए।

ऐसा लगा जैसे हल्की फुहारों से हुआ मुनियों का पाद प्रक्षालन 

इससे पूर्व झड़स मोड तक जाकर जैन पाठशाला के बच्चो ने बैंड बजाते हुए जैन युवा समिति और प्रभावना महिला मंडल की बहनों ने जयकारे लगाए और युवाचार्य श्रुतधर नंदी महाराज की ससंघ अगवानी की। उनकी अगवानी के लिए नगर में पहले से विराजित मुनि श्री शुद्धसागरजी एवं क्षुल्लक श्री अकम्प सागरजी महाराज जी भी गांव से बाहर तक आए। दोनों ही मुनि श्री का एक-दूसरे का हाथ थाम अत्यंत वात्सल्य भाव से नगर प्रवेश अति मंगलकारी था।

जिसे बरखा की हल्की-हल्की फुहारों ने इंद्रधनुषी रूप दे दिया था। इससे पूर्व प्रातः मंदिरजी में 13वें तीर्थंकर विमलनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक पर्व पर मुक्ति का प्रतीक निर्वाण लाडू मुनि श्री शुद्ध सागरजी के ससंघ सानिध्य में समाजजनों ने समर्पित किया। दोपहर में तीन बजे युवाचार्य श्री श्रुतधर नंदी जी ने डडूका से मोर गांव की ओर ससंघ विहार किया। डडूका जैन समाज ने सजल नेत्रों से मुनि संघ को भावभीनी विदाई दी।

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