आचार्य श्री विनम्रसागर जी महाराज का 23 वां गुरु उपकार दिवस सभी समाजजनों की उपस्थिति में दिगंबर जैन धर्मशाला में हुआ। इस अवसर पर अनेक कार्यक्रम किए गए। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ का 1008 उच्चारित मंत्रों से अभिषेक किया गया। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर…
सनावद। रत्नत्रयवर्धिनी ग्रीष्मकालीन वाचना के लिए विराजित आचार्य श्री विनम्रसागर जी महाराज का 23 वां गुरु उपकार दिवस सभी समाजजनों की उपस्थिति में दिगंबर जैन धर्मशाला में हुआ। इस अवसर पर अनेक कार्यक्रम किए गए। आचार्य श्री विनम्रसागर जी महाराज के 23 वें गुरु उपकार दिवस पर तीन दिवसीय कार्यक्रमों में प्रथम दिवस सहस्त्र नाम के 1008 कलशों से श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ का 1008 उच्चारित मंत्रों से अभिषेक किया गया द्वितीय दिवस 48 जोड़ों एवं समाजजनों द्वारा 48 मांडने रचाकर भक्तामर विधान आचार्य संघ के सानिध्य में हुआ। वहीं रात्रि में भक्तामर दीप आराधना हुई । तृतीय मुख्य दिवस पर प्रातः श्रीजी अभिषेक पूजन हुआ। इसके बाद सामूहिक आहार चर्या बड़ा मंदिर के हॉल में हुई। मुख्य दिवस पर आहार दान देने का सौभाग्य पवनकुमार विनीश कुमार गोधा परिवार एवं संतोषकुमार बाकलीवाल परिवार एवं अजमेरा परिवार को प्राप्त हुआ। दोपहर में मुख्य कार्यक्रम के आरंभ में श्री पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर से चतुर्विध संघ नगर के मुख्य मार्गाे से होता हुआ जैन धर्मशाला पहुंचा। जहां सभा का शुभारंभ आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज के चित्र अनावरण इंदौर आए अतिथियों ने किया। दीप प्रज्वलन इंदौर, भोपाल, बांसवाड़ा एवं अन्य नगरों से आए अतिथियों ने किया।
इन्होंने अर्जित किया परम सौभाग्य
मंगलाचरण गवाक्षी, कर्णिका,घनिष्का, लब्धी, नव्या ने किया। इसी क्रम में आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य नितिन जैन बांसवाड़ा परिवार को प्राप्त हुआ शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य राहुल स्पोर्ट्स इंदौर परिवार को प्राप्त हुआ। आचार्य श्री का महा अर्घ्यों से पूजन नगर की सभी संस्थाओं एवं बाहर से पधारे अतिथियों एवं स्थानीय समाजजनों ने किया। कविवर शहनाज़ हुसैन केकड़ी ने अपनी ओजस्वी कविता पाठ से सभा से तालियां बटोरी। गुरु उपकार दिवस पर आचार्य श्री को नवीन पिच्छिका देने का सौभाग्य पवन कुमार भाई विनीश कुमार गोधा सनावद परिवार को प्राप्त हुआ। वहीं पुरानी पिच्छिका पाने का सौभाग्य संधस्थ ब्रह्मचारी अनिल भैया बांसवाड़ा को प्राप्त हुई। आचार्य श्री को नवीन कमंडल देने का सौभाग्य खुशकंवर सुरेशकुमार पांड्या अमर ज्योति बस परिवार को प्राप्त हुआ।
चतुर्विद संघ की 23 दीपों से आरती की
इस अवसर पर आचार्य श्री ने अपनी देशना में कहा कि हमें गुरु पसंद आ जाएं ये बड़ी बात नहीं, हम गुरु को पसंद आ जाएं ये बड़ी बात है। यही हुआ हमें गुरु और गुरुजी को हम पसंद आ गए और हमने गुरु जी से व्रत धारण किए। एक बार गुरुजी के चरणों में समर्पण के देखिए, सारी दुनिया आप को सिर पर उठा लेगी। आचार्यश्री ने कहा कि गुरु बड़ी मुश्किल से पसंद आते हैं। जिनके चरणों में समर्पण हों और जिनके चरणों में समर्पण हों जाएं तो देखिए गुरु आप को क्या नहीं देते। आज का दिन हमारे लिए बहुत बड़ा दिन है। आज से 22 वर्ष पूर्व जो गुरुजी ने जो उपकार किया था वो हम कभी नहीं भूल पाएंगे। दीक्षा गुरु एक होते हैं और शिक्षा गुरु अनेक लेकिन, श्रद्धा गुरु तीन कम नौ करोड़ होते हैं। अंत में चतुर्विद संघ की 23 दीपों से आरती करने का सौभाग्य राजीव जैन इंदौर परिवार को प्राप्त हुआ। साथ ही आचार्य श्री रचित अनेक पुस्तकों का विमोचन बाहर से पधारे अतिथियों ने किया। संचालन सुनील जैन डीपीएस एवं प्रशांत जैन किया। आभार समाज अध्यक्ष मनोज जैन एवं मुनि सेवा समिति अध्यक्ष मुकेश जैन माना। इस अवसर पर बड़वाह, बेड़िया, खंडवा, इंदौर, बांसवाड़ा, भोपाल, सहित अनेक शहरों के समाजजन उपस्थित थे।
संक्षिप्त परिचय
विदित है कि आचार्य श्री विनम्र सागर जी महाराज का पूर्व नाम रतनस्वरूप जैन था। आप का जन्म 1 अक्टूबर 1963 को भिंड में हुआ था। आपने एम.काम डिस्ट्रिक टॉप में की है। आप की ऐलक दीक्षा 9 अगस्त 1992 को द्रोणगिरी में हुई थी। आप की मुनिदीक्षा 8 जून 2003 को ललितपुर में हुई थी। उनको आचार्य पद 12 दिसंबर 2003 में बांसवाड़ा राजस्थान में प्राप्त हुआ था। आप के गुरु राष्ट्र संत आचार्य विराग सागर जी महाराज हैं।













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