आज 8 जून को इस विवाह सीजन का अंतिम शुभ मुहूर्त है। इसके बाद साढ़े पांच महीने तक विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। आमतौर पर विवाह मुहूर्त देवशयन एकादशी तक यानी जुलाई मध्य तक रहते हैं, लेकिन इस बार विशेष खगोलीय परिस्थितियों के चलते मुहूर्त समय से पहले समाप्त हो रहे हैं। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…
मुरैना। आज 8 जून को इस विवाह सीजन का अंतिम शुभ मुहूर्त है। इसके बाद साढ़े पांच महीने तक विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। आमतौर पर विवाह मुहूर्त देवशयन एकादशी तक यानी जुलाई मध्य तक रहते हैं, लेकिन इस बार विशेष खगोलीय परिस्थितियों के चलते मुहूर्त समय से पहले समाप्त हो रहे हैं।
जुलाई में विवाह की इच्छा रखने वालों को झटका
वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन के अनुसार, कई लोग गर्मी के कारण मई-जून की बजाय जुलाई में विवाह करना चाहते थे, लेकिन इस बार यह संभव नहीं हो पाएगा। गुरु तारा 12 जून को आषाढ़ कृष्ण प्रतिपदा गुरुवार के दिन अस्त हो जाएगा और 6 जुलाई, देवशयनी एकादशी के दिन ही उदय होगा। ऐसे में विवाह योग्य मुहूर्त न तो गुरु अस्त के काल में होते हैं और न ही उदय के तीन दिन बाद तक।
विवाह पर रोक अब चार नहीं, साढ़े पांच महीने
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, परंपरागत रूप से देवशयन एकादशी (आषाढ़ शुक्ल एकादशी) से देव जागरण एकादशी (कार्तिक शुक्ल एकादशी) तक चार माह तक विवाह-वर्जना होती है। लेकिन इस बार गुरु तारा अस्त होने के कारण यह अवधि बढ़कर लगभग साढ़े पांच माह की हो गई है। विवाह पर यह प्रतिबंध 22 नवंबर तक लागू रहेगा।
22 नवंबर से शुरू होंगे शुभ मुहूर्त
डॉ. जैन के अनुसार, अगला शुभ विवाह मुहूर्त 22 नवंबर को आएगा। इस सीजन में शुद्ध विवाह मुहूर्त की तिथियाँ हैं—22, 23, 24, 25 और 30 नवंबर, तथा 4 दिसंबर। लोकाचार की दृष्टि से देवप्रबोधिनी एकादशी (2 नवंबर) और भड़ली नवमी को भी विवाह संपन्न किए जा सकते हैं, लेकिन शास्त्र सम्मत विवाह के लिए 22 नवंबर से ही शुरुआत मानी जा रही है।













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