आर्यिका मां विज्ञानमति का ससंघ वरदा राजस्थान से विहार कर पुनर्वास कॉलोनी सागवाड़ा आना और वहां से विहार कर परतापुर में आयोज्य शिक्षण संस्कार शिविर की ओर बढ़ते कदम तय समय 29 मई तक पहुंचने के। ऐसा मौसम, नंगे पांव तपते डामर पर चलना, दिन में एक बार भोजन, एक ही बार पानी, एक ही वस्त्र पहनना ये काफी मुश्किल है। डडूका से पढ़िए, यह खबर…
डडूका। नौ तपा की भीषण गर्मी, उमस और लू चलने का दौर, ऐसे में जैन साध्वी आर्यिका मां विज्ञानमति का संसंघ वरदा राजस्थान से विहार कर पुनर्वास कॉलोनी सागवाड़ा आना और वहां से विहार कर परतापुर में आयोज्य शिक्षण संस्कार शिविर की ओर बढ़ते कदम तय समय 29 मई तक पहुंचने के। ऐसा मौसम, नंगे पांव तपते डामर पर चलना, दिन में एक बार भोजन, एक ही बार पानी, एक ही वस्त्र पहनना ये काफी मुश्किल है। असंभव मगर इसे संभव कर रहे हैं हमारे जैन संत। ऐसे संतों को नमन करने और उनके विहार में सम्मिलित होने का सौभाग्य मुझे भी मिला, जब अजीत कोठिया, प्रदीप सेठ, रीतेश शाह, वीरेंद्र एस शाह एवं रॉकी गांधी माताजी के दर्शन करने और श्रीफल भेंट करने डडूका से पुनर्वास कॉलोनी सागवाड़ा पहुंचे।
1008श्री विमलनाथ जिनालय में विराजित विज्ञानमति माताजी संसंघ के दर्शन कर जीवन धन्य हो गया। भगवान शांतिनाथ के जन्म, तप, मोक्ष कल्याणक का दिन, सोमवार चतुर्दशी तिथि होने से माताजी का उपवास और मौन साधना, अब उनके दर्शन तो मिले, आशीर्वाद भी पर बात नहीं हो सकी। काश ऐसी साध्वी तपस्वी, विदुषी माताजी के चातुर्मास का सौभाग्य हमें मिल जाए, हम प्रयत्नशील हैं। इसके लिए हमारे डडूका में हमारे जीवन काल में विगत 90 वर्षों में किसी भी जैन मुनि या माताजी का चातुर्मास नहीं हुआ है।
सभी की यह हार्दिक इच्छा है कि जैन समाज डडूका को इस वर्ष विज्ञान मति माताजी या उनके संघ की किन्हीं साध्वियों के चार्तुमास का सौभाग्य मिले। युवाओं और पंचों की टीमें रोजाना माताजी के विहार में सम्मिलित हो रही हैं। अंकित शाह और समाज के सभी युवा रोजाना इस काम में लगे हैं। समाज अध्यक्ष राजेश शाह के प्रयास इस दिशा में जारी है ओर सभी को आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि इस बार डडूका मंे किसी न किसी माताजी का चौमासा होगा। उम्मीद पर दुनिया चलती है, हमारी उम्मीद और प्रयास अवश्य साकार होने वाले हैं ऐसी पूरे दिगंबर जैन समाज डडूका को आशा है।













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