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राष्ट्रपति के सानिध्य में कार्यक्रम : ‘जैन श्रुतवंदना’ से हुआ 58वें ज्ञानपीठ पुरस्कार समारोह का शुभारंभ


ज्ञानपीठ पुरस्कार समारोह का शुभारंभ डॉ. इन्दु जैन ‘राष्ट्र गौरव’ द्वारा प्रस्तुत जैन श्रुतवंदना के मंगलाचरण से हुआ। डॉ. इन्दु जैन ने प्राकृत-अपभ्रंश भाषा में निबद्ध जैन श्रुतदेवी (सरस्वती) की स्तुति का भावार्थ सहित सस्वर वाचन करते हुए समारोह की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गरिमा को और भी समृद्ध किया। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


नई दिल्ली। ज्ञानपीठ पुरस्कार समारोह का शुभारंभ डॉ. इन्दु जैन ‘राष्ट्र गौरव’ द्वारा प्रस्तुत जैन श्रुतवंदना के मंगलाचरण से हुआ। डॉ. इन्दु जैन ने प्राकृत-अपभ्रंश भाषा में निबद्ध जैन श्रुतदेवी (सरस्वती) की स्तुति का भावार्थ सहित सस्वर वाचन करते हुए समारोह की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गरिमा को और भी समृद्ध किया।

इस अवसर पर भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने संस्कृत के महान विद्वान जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी को 58वां ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया। उन्होंने इस अवसर पर कवि गुलज़ार को भी परोक्ष रूप से सम्मानित करते हुए उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

डॉ. इन्दु जैन, जो राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में विशेषज्ञ सलाहकार सदस्य हैं, भारत और विदेशों में जैन समाज का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्हें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित देश की विभिन्न प्रमुख विभूतियों के समक्ष संचालन, मंगलाचरण और वैचारिक अभिव्यक्ति का अवसर मिलता रहा है।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति महोदया ने साहित्य को समाज को जोड़ने और जागरूक करने का माध्यम बताया। उन्होंने भारतीय साहित्य की समृद्ध परंपरा की प्रशंसा करते हुए भारतीय ज्ञानपीठ ट्रस्ट के कार्यों की सराहना की, जो 1965 से विभिन्न भारतीय भाषाओं के श्रेष्ठ साहित्यकारों को सम्मानित कर रही है और भाषाई विविधता की गरिमा को सशक्त बना रही है।

इस गरिमामयी अवसर पर ज्ञानपीठ प्रवर परिषद की अध्यक्ष डॉ. प्रतिभा राय, ज्ञानपीठ ट्रस्ट के अध्यक्ष न्यायमूर्ति विजेन्द्र जैन, प्रबंध न्यासी साहू अखिलेश जैन, के.एल. जैन, डॉ. प्रभाकिरण जैन सहित देश के कई प्रतिष्ठित साहित्यकार, कलाकार और शिक्षाविद् उपस्थित थे।

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